Rajendra Devray / Mon, Apr 14, 2025 / Post views : 26
- नालछा नदि को पुनर्जिवित व बारहमासी प्रवाहित करने के बस सपना अब अधूरा रहता नजर आ रहा है ।नदी को हरा भरा बनाने के उद्देश्य से पूर्व में बनाई गई योजनाओं पर अब पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है।वहीं दूसरी तरफ अब 26 किलोमीटर बहने वाली नालछा नदी का अस्तित्व खतरे में दिख रहा है। प्राचीन समय में इस नदी पर बनी 30 से अधिक जल संरचनाएं अनदेखी का शिकार हो रही है। इन जल संरचनाओं पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण गाद भरने की वजह से प्रतिवर्ष हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। जबकि सरकार का महत्वपूर्ण जल गंगा अभियान में जोड़कर इस पर कार्य किया जाना चाहिए।
जल संवर्धन व प्राचीन जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के लिए प्रतिवर्ष शासन द्वारा अभियान चलाए जाते हैं। लेकिन मैदानी स्तर पर जिन जल संरचनाओं को वास्तविक में इन अभियान के माध्यम से पुनर्जीवित व बारहमासी जीवित रहने वाला बनाए जा सकता है वह जल संरचनाएं अनदेखी का शिकार होती है। नालछा नदी गांव भील बरखेड़ा से उद्गम होकर बंजारी पुरा में कारम नदी पर मिलकर खलघाट के नर्मदा नदी में मिलती है।
15 स्टॉप डेम व 20 चेक डैम में भरा है गाद
इस नदी पर वाटर सेट एवं ग्राम पंचायत के माध्यम से करीब 15 स्टाफ दम एवं हिंदी से अधिक चेक डैम बनाए गए थे। इन जल संरचनाओं का सुखद परिणाम यह रहा की इसमें जल संवर्धन के साथ-साथ इस आसपास के क्षेत्र में जल स्तर में भी बड़ोतीरी हुई थी। और इसमें गर्मी के दिनों तक पानी भरा रहता था लेकिन समय के साथ-साथ अभी जल संरचनाओं में गाद जमा हो चुकी है जिसके कारण नाम मात्र पानी रुक पाता है। जिससे बारिश के दिनों में प्रतिवर्ष हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है।
जल गंगा अभियान से जोड़ा जाना चाहिए
शान द्वारा प्रतिवर्ष जल संरचनाओं के लिए एवं उनके जीर्णोद्धार के लिए अभियान चलाए जाते हैं लेकिन 26 किलोमीटर की इस नदी पर महज इक्का-दुक्का स्थान पर ही कार्य किए गए बाकी यह नदी अनदेखी का शिकार हो रही है। जबकि अभियान से जोड़कर इसकी गाद निकाली जाए तो इसके सकारात्मक परिणाम देखने मिलेंगे।
2011-12 में डीपीआर बनाई गई थी।
नदी को पुनर्जीवित एवं बारहमासी प्रभावित करने के उद्देश्य से इसमें सभी विभागों को जोड़कर अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग कार्य किए जाने थे। इसमें करीब 3003.59 लाख रूपये की 2011-12 में डीपीआर बनाई गई थी। योजना पर महज 30 फ़ीसदी काम हो पाया था। और योजना को बंद कर दिया गया।
खास खास
*26 किलोमीटर की इस नदी पर 30 से अधिक बनी है प्राचीन जल संरचनाए।
*योजना पर काम होता तो नदी के दो से तीन किलोमीटर के हिस्से में भूजल स्तर की वृद्धि होती वह गर्मी में भी पानी मिलता।
*1400 हेक्टयर में फसलों के अतिरिक्त उत्पादन के साथ करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में दो से तीन पैदावार होती।
*26 गांव के 2837 परिवारों को एवं उनके करीब 14हजार मवेशियों को पीने के पानी की सुविधा होती है।
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