Rajendra Devray / Mon, Mar 17, 2025 / Post views : 26

कोईमन मे स्वीकार करना है और मन मे जैसी कल्पना है वैसे बनाना है। आज का विषय ठीक वही है राष्ट्र का पुरजागरण पंच परिवर्तन के माध्यम से करना है।
उक्त बात स्वामी विवेकानंद व्याख्यानमाला समिति द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला में प्रज्ञा प्रवाह संयोजक विनय दीक्षित ने "पंच परिवर्तन से राष्ट्र परिवर्तन" विषय पर हजारों श्रोताओं के समक्ष कही।
आगे आपने कहा कि पंच परिवर्तन का मतलब पहला सामाजिक समरसता, दूसरा कुटुंब प्रबोधन, तीसरा पर्यावरण संरक्षण, चौथा स्व का बोध एवं पंचवा नागरिक कर्तव्य इनमें परिवर्तन करने से राष्ट्र का पुनर्जागरण होगा।
आगे उन्होंने कहा कि राष्ट्र समाज से बनता है, राष्ट्र की परिभाषा भूमि, जल ओर संस्कृति तीन चीजों से होती है। भूमि मतलब एक भौगोलिक परिक्षेत्र वहां रहने वाले लोग हो और उनकी एक अनुपम संस्कृति हो ये तीन चीजे है तो वो एक राष्ट्र है। संस्कृति कभी मिटती नही है इसलिए हमारा भारत राष्ट्र भी चिरंतन है। सदियों पुराना है।
आगे उन्होंने कुटुंब प्रबोधन पर कहा की राष्ट्र का पुनर्निमाण करना है तो परिवारों को खड़ा करना होगा, परिवार बचेंगे तो भारत बचेगा, भारत की आत्मा परिवारों में रहती है।
समाजिक समरसता पर कहा कि जातियां हमारी समस्या नही है बल्कि हमारे सनातन धर्म का श्रृंगार है। समस्या यह है कि किसी को बड़ा या छोटा मानना, जातिगत भेद करना, छुआ छूत करना इस समस्या को हमे दूर करना है।
वही पर्यावरण पर कहा कि पर्यावरण का सम्बंध परिवारों से है। जो हम बना नही सकते उसे बिगाड़ने का अधिकार भी नही है। अतः प्रकृति ने हमे जो दिया है उसे सहेज कर रखना है।
वही नागरिक कर्तव्य व स्व का बोध पर अन्य सारगर्भित बाते बताई।
स्थानीय सरस्वती शिशु विद्या मंदिर प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियो द्वारा भारत माता, स्वामी विवेकानन्द व स्वामी अमूर्तानंदपूरी के चित्र का पूजन कर द्वीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त स्वास्थ चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर जयप्रकाश पण्डित ने मंचासीन रहकर सम्बोधित किया। अध्यक्षीय उद्बोधन समिति अध्यक्ष अधिवक्ता राजेन्द्र श्रीवास ने दिया।
इस अवसर पर समिति के सदस्य रहे स्व.संजय मोगरिया को दो मिनिट का मौन रखकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गईं।
सरस्वती वंदना सरस्वती शिशु मंदिर की बहनो द्वारा दी गई, अतिथि परिचय भावना पाटीदार व विवेकानन्द पर विचार राधा परमार द्वारा दिया गया। व्यक्तिगत गीत अंकित पाटीदार द्वारा दिया गया। कार्यक्रम का संचालन गणेश कुशवाह व आभार सुनील भावसार ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर नगर सहित आस-पास के नगरों व ग्रामीण क्षेत्र से हजारों की संख्या में युवा, बुजुर्ग, मातृशक्ति व गणमान्यजन मौजूद रहे।
फोटो:- व्याख्यान देते हुए मुख्य वक्ता विनय दीक्षित व उपस्थित श्रोतागण।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन