: सनातन संस्कृति में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है मनावर में सभी प्राचीन शिवालयों में शिवरात्रि पर्व की धूमधाम रहेगी बड़ी संख्या में भक्त करेंगे दर्शन
Rajendra Devray
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Tue, Feb 25, 2025
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नगर में भी सभी प्राचीन शिवालयों में शिवरात्रि पर्व की धूमधाम
मनावर।। सनातन संस्कृति में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन शिवजी का विवाह माना जाता है। वहीं मान्यता है जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करता है। भोलेनाथ उसके सभी कष्ट हर लेते हैं।
मनावर नगर में भी सभी प्राचीन शिवालयों में शिवरात्रि पर्व की धूमधाम से तैयारी की गई हैं। सिंघाना रोड स्थित बंकनाथ अटल दरबार मंदिर, मंगला देवी स्थित प्राचीन भोलेनाथ, जागेश्वर महादेव मंदिर और देवर महादेव जैसे सभी प्राचीन मंदिरों में शिवरात्रि को लेकर भक्तों के लिए विशेष रूप से तैयारीयां की गई है।
पंचांग अनुसार महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट से आरंभ होगी और इस तिथि का समापन 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 53 मिनट पर होगा। वहीं शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि की पूजा में रात्रि के प्रहर की पूजा विशेष मानी जाती है।
शास्त्रों में महाशिवरात्रि मनाने की कई कथाएं मिलती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पहली बार भोलेनाथ ज्योतिर्लिंग में प्रकट हुए थे। साथ ही वे एक विशाल अग्निस्तंभ (ज्योतिर्लिंग) के रूप में आए, जिसका कोई आदि और अंत नहीं था। और इसे महाशिवरात्रि के रूप में मनाया गया। वहीं शिवपुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही भोलेनाथ और मां पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। आपको बता दें कि माता पार्वती ने भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने फाल्गुन महीने की कृष्ण चतुर्दशी को उनसे विवाह किया था। ऐसे में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य में भी मनाया जाता है।
फोटो - मनावर के देवरा स्थित प्राचीन भोलेनाथ देवर महादेव।