: बगड़ी मानपुर मार्ग पर नाई बरोदा फाटे के समीप अज्ञात वाहन ने स्कूटी सवार को मारी टक्कर, युवक की मौके पर मौत गांव में छाया मातम, रंग पर्व की खुशियां बदली मातम में
Rajendra Devray
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Wed, Mar 19, 2025
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*बगड़ी मानपुर मार्ग पर नाई बरोदा फाटे के समीप अज्ञात वाहन ने स्कूटी सवार को मारी टक्कर, युवक की मौके पर मौत*
*गांव में छाया मातम, रंग पर्व की खुशियां बदली मातम में*
*परिवार का एक लोता चिराग बुझा, 3 व 4 वर्ष की दो बेटियों के सर से पिता का साया हटा, बच्चियों की पथराई आंखें पिता को ढूंढ रही है*
रिपोर्टर/कान्ति लाल शर्मा नालछा
बगड़ी/बगड़ी मानपुर मार्ग पर मंगलवार देर शाम को एक अज्ञात वाहन की टक्कर में एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जाता है कि ग्राम कुंजरोद का रहने वाला युवक लेबड मानपुर टोल टैक्स का कर्मचारी था। दर्दनाक हादसे में रंग पंचमी की खुशियां मातम में बदल गई।इधर इस हादसे में परिवार का एक लोता चिराग बुझ गया। गमगीन माहौल में बुधवार सुबह युवक का अंतिम संस्कार किया गया। इधर 3स 4 वर्ष की दो छोटी बच्चियों के सर से पिता का साया उठने के बाद बच्चियों की पथराई आंखें अपने पिता को ढूंढ रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बगड़ी मानपुर मार्ग पर ग्राम नाईबरोदा के समीप मंगलवार देर शाम को स्कूटी पर सवार ग्राम कुंजरोद का रहवासी संदीप पिता प्रेम ठाकुर उम्र 32 वर्ष मानपुर की ओर जा रहा था तभी सामने से आ रही अज्ञात वाहन की टक्कर में युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मार्ग से गुजर रहे ग्रामीणों ने इसकी सूचना गांव कुंजरोद में दी एवं पुलिस को सूचना दी गई उसके बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे जब तक युवक की मौत हो गई थी। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर अज्ञात वाहन की जांच शुरू कर दी है।
*रंग पर्व की खुशिया बदली मातम में*
इधर 32 वर्षीय युवक संदीप की मौत की जानकारी लगने के बाद गांव में मातम छा गया था रंग पंचमी की सुबह पोस्टमार्टम के बाद उसका शो जैसे ही गांव में लाया गया तो परिवार में चीख पुकार मच गई थी। रंग पर्व की खुशियां मातम में बदल गई।
*घर का एक लोता चिराग बुझा, बेटियां पिता को ढूंढ रही है*
युवक की मौत के बाद परिवार को ऐसा दर्द दे गया है। कि जो जीवन भर नहीं भूलाया जा सकता है।बताया जाता है कि मृतक युवक की दो बेटियां हैं। जिनकी उम्र तीन व चार वर्ष की है। मृतक संदीप परिवार में अकेला था दो छोटी बच्चियों के साथ पत्नी वह विकलांग माता के घर में अब कमाने वाला कोई नहीं बचा है। ऐसे में परिवार के जीवनचर्य के लिए अब संकट खड़ा हो गया है। गत वर्ष सर से पिता का निधन हुआ था इस वजह से इस होली का पर्व उनका पहला त्यौहार था। अंतिम संस्कार के बाद दोनों छोटी बच्चियों की आंखें अपने पिता को ढूंढ रही है।