Rajendra Devray / Sun, Jun 22, 2025 / Post views : 263





संगीत से शुरू हूवा सलीम खान का सफर संगीत में विलीन हुवा
गायक सलीम खान के अचानक
चले जाने से संगीत के क्षेत्र में शोक की लहर
सलीम खान का अचानक चले जाने से संगीत प्रेमियों में गहरा दुख
बड़वानी शहर की संगीत की दुनिया का अपना एक नाम हे शहर में कई कई संस्थाएं संगीत के अंदर अपना कार्य कर रही है और समय-समय पर संगीत की प्रतियोगिताएं आयोजित कर संगीत में अपना नाम कमाने वाले गायको को मंच देती है
बड़वानी शहर के अंदर पारंपरिक गरबे हो उसमें संगीत देना हो या संगीत निशा का आयोजन हो सभी में बड़वानी जिले के गायकों ने अपना लोहा पूरे प्रदेश में मनवाया है
कहते हैं योग्यता किसी की मोहताज नहीं होती ऐसे ही हमारे बीच जो आज नहीं रहे हे
हम उनकी बात कर रहे हैं
छोटे से गरीब परिवार से आने वाले सलीम खान जिनके अंदर गायकी का ऐसा हुनर था जो अपने छोटे-मोटे काम करने के साथ अपने परिवार के पालन पोषण के साथ दिन प्रतिदिन गायकी का होना लगा
उनके अंदर केवल संगीत ही था यही कारण था कि सुर के साथी म्यूजिकल ग्रुप किं प्रमुख पिंकी गुप्ता से उनका परिचय हुआ और फिर गायकी का सफर यहीं से शुरू हुआ कम समय में ही सलीम खान ने सुर के साथी म्यूजिकल ग्रुप के साथ मिलकर कई कार्यक्रमों के अंदर अपनी
सुमधुर आवाज से सबको अपनी ओर खींचने में सफल रहे
और उनकी सुरीली आवाज से सभी का ध्यान उन्होंने अपनी और आकर्षित किया
कम समय के अंदर ही सलीम खान ने बड़वानी शहर के लगभग लगभग हर म्यूजिकल ग्रुप के साथ गायन में अपनी कला का लोहा मनवाया और कई पुरस्कार भी जीते
परिवार की आर्थिक स्थिति एकदम सामान्य थी स रोज कमाना और रोज खाने की स्थिति के बावजूद भी गाने का जुनून संगीत का जुनून उनको सितारों की तरह ऊपर ले जाने लगा
और के सुर के साथी म्यूजिकल ग्रुप के सभी सहयोगियों ने सलीम खान का खूब सहयोग किया और उन्हें आगे बढ़ाया सफलता आगे बढ़ रही थी उड़ान ऊंची हो रही थी सपने अपने बुनियादी सपनों को बुन रहे थे
तभी अचानक दिल जब जोर देने वाली खबर आई कि हमारे बीच सलीम खान साहब नहीं रहे अचानक हम सबको छोड़कर वह इस दुनिया से चले गए हैं जिन्होंने भी सुना वह एकदम सन्न रह गया
सलीम खान हमारे बीच रहे यह ईश्वर को यह मंजूर नहींथा
अपना दुनिया मे छोटे से स्तर से ऊपर तक पहचान बनाने वाले सलीम खान जो एक मध्यम परिवार में जन्मे और स्वयं के परिवार में माता-पिता और एक बालक , दो बेटियाँ, एक पोती , पत्नी सहित छोटे परिवार में रहकर ड्राइविंग का काम करके पारिवारिक आजीविका चलाते थे
सुर के साथी म्यूजिकल ग्रुप की प्रमुख पिंकी गुप्ता का कहना है कि इतनी जिम्मेदारीयों के बावजुद सलीम भाई में संगीत के प्रति गजब का जुनून था मेरी और सलीम भैया की एक मुलाकात संगीत के कार्कर्म पर हुई तब मुझे लगा कि सलीम भैया में संगीत की कला है पहली बार सलीम भैया ने कुमार शानू म्यूजिकल ग्रुप के मंच से गीत गाया।
सफल गायन के बाद भैया ने निरंतर प्रेक्टिस करके एक अच्छे गायक के रूप में उभरे ओर उन्होंने अपना स्वयं का दोस्ताना म्यूजिकल ग्रुप बनाया।
उन्होंने संगीत के क्षेत्र में नाम कमाया
परन्तु आज वो हम सबके बीच नही है लेकिन संगीत जगत में सलीम भैया अमिट ओर अटल रहेंगे हमारे बीच सदेव रहेंगे
*आज विश्व संगीत दिवस पर उन्हें में और अपने सुर के साथी म्युजिकल ग्रुप की ओर से भाव पूर्ण श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि देती हूँ
साथी बड़वानी जिले के सभी संगीत म्यूजिकल ग्रुप के द्वारा भी इन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई है 2 मिनट का मोन रखकर प्रार्थना की गई है
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे
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