नगर के युवक जोएब आसिफ ने अपने विवाह की वर्षगांठ पर 32 वी बार अपने छह साथियों के साथ रक्तदान कर रक्तदान का दिया संदेश।।
नगर अंजड़ में जोएब आसिफ के विवाह वर्षगांठ पर उन्होंने रक्तदान करने का संकल्प लिया और अपने 5 साथियों के साथ बड़वानी ब्लड बैंक में जाकर रक्तदान किया वैसे पूरे जिले भर में सैफी ब्लड फाउंडेशन के नाम से संचालित यह फाउंडेशन समय-समय पर रक्तदान कर पीड़ितों की जान बचाता है और इनकी रक्तदान समितियों के द्वारा समय समय पर अपने रक्तदाता को भेजकर कई रक्त से पीड़ित मरीजों की जान बचाई गयी है, हमारी रक्तदान समितियां के द्वारा निस्वार्थ भाव से रक्तदान किया जाता है इसमें कोई भी जाति धर्म और लिंग भेद का कोई भी भेदभाव नहीं किया जाता है जिसे भी आवश्यकता होती है और वह हमसे संपर्क करता है और हमारे संपर्क में जो भी आता है, ओर जिस ब्लड ग्रुप की भी जरूरत पड़ती है, उस ब्लड ग्रुप के सभी रक्त साथी हमारे साथ उपलब्ध रहते है, और एक मैसेज के तुरंत बाद ही रक्तदाता पीड़ित के पास पहुंच जाता है और रक्तदान करता है इनका यह कार्य निश्चित ही बड़वानी जिले के अंदर एक सर्वोत्तम मानवता की मिसालहै
नगर अंजड़ के जोएब भाई से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि हमारा प्रयास रक्त की कमी से जूझते हुए मरीजों का जीवन बचाना है उनकी यह सामाजिक सेवा निश्चित तौर पर एक विशाल मानवता का संदेश देती है
ये हमेशा रक्तदाताओं को प्रेरित भी करते हैं रक्तदान भी करवाते हैं और आधी रात को भी यदि किसी पीड़ित का फोन आता है तो तत्काल उन तक रक्त की व्यवस्था करते हैं ऐसे कार्य करने वाले समाजसेवी जोएब आसिफ की विवाह वर्षगांठ पर उन्होंने अपने 5 साथियों के साथ बड़वानी ब्लड बैंक में जाकर ब्लड डोनेट कर एक मानवता का शानदार संदेश दिया है आसिफ ने बताया कि मैंने अपने जीवन का आज 32 वा रक्तदान किया, मेरे साथ जन सेवा रक्तदान समिति भारत मप्र,सैफी ब्लड फाउंडेशन बड़वानी,अल शिफा ब्लड फाउंडेशन अंजड़ के जाबाज़ साथीयो अमजद भाई, मोहम्मद शाद, समीर पटेल, खुजेमा नागलवाड़ी, हुसैन बड़दा ने अंजड़ से बड़वानी चलकर ब्लड बैंक में मेरे साथ अपना रक्तदान उन्होंने अपने विवाह वर्षगांठ को शानदार तरीके से मानवता की सेवा कर मनाया है इसके लिए उन्हें इष्ट मित्रों के द्वारा और प्रेस परिषद के अध्यक्ष राजेंद्र देवराय के द्वारा बधाई प्रेषित की गई है
आपका मानवतावादी यह कार्य निरंतर आगे बढ़ता रहे और सभी को प्रेरणा देता रहे
कदम कदम पे चट्टानें खडी़ रहें लेकिन
जो चल निकले हैं दरिया तो फिर नहीं रुकते,
हवाएँ कितना भी टकराएँ आँधियाँ बनकर
मगर घटाओं के परचम कभी नहीं झुकते।।