Rajendra Devray / Thu, Sep 11, 2025 / Post views : 316


पूरे पांडाल को रंग-बिरंगे गुब्बारों, नीम और केल के पत्तों से आकर्षक रूप से सजाया गया।
कथा वाचन करते हुए भागवताचार्य पं. रुपेश अग्निहोत्री (शास्त्री) ने जब भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का वर्णन किया, तो संपूर्ण पांडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। उन्होंने श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा और धर्म की स्थापना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामचरित्र, मानव को सत्य, धैर्य और कर्तव्यपालन का मार्ग दिखाता है।
*श्री कृष्ण जन्मोत्सव*
इसके बाद कथा में जब श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आया तो वातावरण और भी आनंदमय हो गया। बालक कृष्ण का रूप धरे शिशु को वासुदेव की वेशभूषा में टोकरी में लेकर जैसे ही पांडाल में प्रवेश कराया गया, पूरा पांडाल नंद के घर आनंद भयो, जय हो नंदलाल की… हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की के जयघोष से गूंज उठा। भक्त श्रीकृष्ण के वात्सल्य स्वरूप को निहारकर भावविभोर हो उठे। भगवान का आकर्षक श्रृंगार कर पालना झुलाया गया और जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
इस अवसर पर भागवताचार्य ने कहा कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य ही भागवत कथा के प्रमुख आधार हैं। भगवान श्रीकृष्ण तक पहुँचने के लिए राधा जैसी निष्कलुष प्रेम भावना और मीरा जैसी अटूट भक्ति आवश्यक है। उन्होंने भक्त प्रह्लाद एवं हिरण्यकश्यप की कथा का उल्लेख करते हुए भक्तिमार्ग की महिमा पर भी प्रकाश डाला।
*माखन-मिश्री और 56 भोग*
जन्मोत्सव अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री एवं छप्पन भोग अर्पित किए गए। तत्पश्चात भगवान की महाआरती कर प्रसादी का वितरण किया गया।
कथा के बीच भजन गायक योगेश शर्मा ने सुमधुर भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु झूमते और नृत्य करते नजर आए। संगीत टीम में बड़नगर से आए ढोलक वादक गोपाल राव, पेड पर शुभम चौहान और की-बोर्ड पर योगेश शर्मा ने अपनी सेवाएं दीं। भक्ति गीतों की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को दिव्य और उत्साहपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में परिवारजन, नगरवासी, श्रद्धालुजन एवं मातृशक्ति उपस्थित रही।
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