Rajendra Devray / Sun, Jul 27, 2025 / Post views : 278
रिपोर्टर//कान्ति लाल शर्मा नालछा
बगड़ी/ समीप के ग्राम सिलोदा खुर्द में रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया घर से बिना बताए गांव के ही तालाब में नहाने के लिए निकल पड़े दो मासूम बालको की डूबने से मौत हो गई। जिससे पूरे क्षेत्र में अपरा तफरी मच गई थी। और शोक का माहौल छा गया था। करीब 2 घंटे बाद जानकारी लगने के बाद ग्रामीण पहुंचे तालाब पर और तालाब से दोनों बालकों के शव बाहर निकाले तब तक दोनों की ही मौत हो गई थी।
मामला धार जिले के ग्राम बगड़ी से लगे सिलोदा खुर्द का है जहां यह हादसा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बालक लव पिता शेरु 13 वर्ष ग्राम सिलोटिया और बालक शोभित पिता हेमंत जंजाल 12 वर्षी सिलोदा खुर्द दोनों ही बच्चे करीब 12 बजे के बाद घर से खेलने के लिए निकले थे। तभी यह कब नहाने के लिए तालाब पर पहुंच गए किसी को उसकी जानकारी नह थी।
*तालाब की पाल पर पड़े कपड़ों से मिली जानकारी*
काफी देर तक बच्चे जब घर नहीं पहुंचे तो परिजन उन्हें ढूंढ रहे थे तभी खेत पर जा रहे हैं युवक की नजर तालाब की पाल पर पड़ी वहां बच्चों के कपड़े को जूते चप्पल दिखाई दिए इस बात की सूचना ग्रामीण ने गांव में दी तभी गांव के लोग वहां पहुंचे और तालाब से दोनों ही बच्चों के शव बाहर निकाले। बताया जाता है कि करीब 2 घंटे तक दोनों ही बच्चों पानी में रहे। दोनो बच्चों को बाहर निकाल कर परिजन व ग्रामीण उपचार के लिए जिला चिकित्सालय पहुंचे जहां पर चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
*जिला चिकित्सालय में हुआ पीएम*
मृतक दोनों बालको का पोस्टमार्टम शाम 6:00 बजे जिला चिकित्सालय में हुआ पीएम के बाद बच्चों के शव परिजनों को दिए गए।
*दो घरों के चिराग बूझे, देर शाम हुआ अंतिम संस्कार*
ग्रामीणों ने बताया कि बालक लव और शोभित दोनों ही अपने माता-पिता के एक लोते पुत्र थे। बड़ी महान मन्नत के बाद दोनों घरों में बालकों का जन्म हुआ था। दोनों ही घर के चिराग बुझ गए। लव के माता-पिता एक दिन पूर्व ही शनिवार को अपने मांमां के यहां सिलोदा खुर्द छोड़कर ओंकारेश्वर दर्शन के लिए गए थे उन्हें क्या पता था कि ऐसा हादसा हो जाएगा।
*परिवार में छाया मातम परिजन हुए बे सुध*
पोस्टमार्टम के बाद दोनों बच्चों के शव अपने-अपने घरों में पहुंचे जैसे ही माता-पिता ने अपने लालडे के चेहरे देखे तो वह बेसुध हो गए परिवार में मातम छा गया गमगीन माहौल में
देर शाम को सिलोदा खुर्द ओर सिलोटिया में अंतिम यात्रा निकाली जिसे देख हर किसी की आंखों से आंसू छलक पड़े थे क्योंकि दोनों ही बच्चे प्रतिदिन घर आंगन में खेलने के साथ स्कूल जाते थे
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