Rajendra Devray / Wed, Jul 8, 2026 / Post views : 305
भोपाल। नर्मदा अवॉर्ड के तहत वर्षों से लंबित भुगतान को लेकर मप्र, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के बीच चला आ रहा विवाद आखिरकार खत्म हो गया। मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समझौते पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए।
इसके साथ ही सरदार सरोवर परियोजना की लागत साझेदारी और लंबित भुगतान से जुड़े दशकों पुराने विवाद के समाधान का रास्ता साफ हो गया।
सभी लंबित देयों का निपटारा एकमुश्त (वन-टाइम सेटलमेंट) के जरिए किया जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि मप्र और गुजरात के बीच सरदार सरोवर बांध के मुआवजे को लेकर मध्य प्रदेश और गुजरात के अधिकारियों के बीच कई बार आर्बिट्रेशन हो चुका है, लेकिन मुआवजे का विवाद सुलझ नहीं पाया।

नर्मदा अवॉर्ड के लंबित भुगतान का विवाद चल रहा था, जिसका आज सौहार्दपूर्ण समाधान निकल गया है।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए कई ऐतिहासिक पहल की गई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अनेक राज्यों में डबल इंजन सरकार बनने का लाभ यह हुआ है कि हम में एक-दूसरे को समझने की क्षमता बढ़ी है
राजनीतिक मुद्दे कम हुए हैं और देश के अनेक विवाद अब तेजी से सुलझाए जा रहे हैं। केन्द्रीय मंत्री ने इस महत्वपूर्ण अंतर-राज्यीय परियोजना पर आम सहमति बनाने में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र की सरकारों द्वारा दिए गए रचनात्मक सहयोग की सराहना की। शाह ने कहा कि इस परियोजना से विशेषकर मध्य प्रदेश, गुजरात तथा राजस्थान को बहुत लाभ हुआ। बांध पूरा होने से इन राज्यों में हर जगह पानी और बिजली पहुंची।
उन्होंने कहा कि राजस्थान को हुआ लाभ दिखने में छोटा लग सकता है, पर जिस भूमि तक नर्मदा का पानी पहुंचा है, वहां भूमि का मूल्य और किसान की किस्मत दोनों बदल गई है।
केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात मप्र के हितों पर हुई चर्चामुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दो दिवसीय नई दिल्ली प्रवास के दौरान मप्र के हितों से संबंधित विषयों पर विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों और संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर चर्चा की।
उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से अलग- मुलाकात की
7600 करोड़ रुपए मांग रहा था मध्य प्रदेशमप्र सरकार गुजरात से सरदार सरोवर परियोजना के मुआवजे के तौर पर 7600 करोड़ रुपए मांग रहा था, जबकि गुजरात सरकार 300 करोड़ रुपए से ज्यादा देने को तैयार नहीं था। नर्मदा घाटी विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध के लिए अधिग्रहीत और डूब क्षेत्र की भूमि के मुआवजे को दो श्रेणियों में बांटा गया था। निजी भूमि, घरों और अन्य संरचनाओं के अधिग्रहण के लिए मुआवजे का भुगतान किया गया है, लेकिन मप्र के निमाड़ क्षेत्र में खदानों, राजस्व और वन भूमि के डूब क्षेत्र के लिए अभी तक कोई भुगतान नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मप्र सरकार ने धार, बड़वानी, खरगोन व अलीराजपुर जिले के 178 गांवों में डूब क्षेत्र की खदानों, राजस्व और वन भूमि के मुआवजे के रूप में 7600 करोड़ रुपए का भुगतान करने के लिए करीब 5 साल पहले गुजरात सरकार से संपर्क किया था। मुआवजे की गणना 2019-20 में संपत्ति और भूमि कलेक्टर गाइडलाइन दरों पर की गई थी।एक-एक कर सुलझाए जा रहे जल विवादबैठक के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबे समय से नर्मदा अवॉर्ड के लंबित भुगतान का विवाद चल रहा था, जिसका आज सौहार्दपूर्ण समाधान निकल गया है। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए कई ऐतिहासिक पहल की गई हैं।
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