Rajendra Devray / Mon, Jul 6, 2026 / Post views : 235
18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण का विरोध तेज, सरकार फैसला वापस ले
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्वास्थ्य मंत्री को संयुक्त मंच ने भेजा ज्ञापन
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा रीवा, देवास और गुना जिले के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को निजी संस्थाओं के माध्यम से संचालित करने की प्रस्तावित प्रक्रिया का विरोध तेज हो गया है। स्वास्थ्य पेशेवरों, कर्मचारियों और जनस्वास्थ्य संगठनों के संयुक्त मंच 'एक्शन अगेंस्ट प्राइवेटाइजेशन ऑफ हेल्थ सर्विसेज, मध्य प्रदेश' ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन भेजकर इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का निजीकरण प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करेगा।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे बड़ी चुनौती निजीकरण नहीं, बल्कि अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के हजारों रिक्त पद, स्वास्थ्य संस्थानों की कमी और अपर्याप्त बजट है। इन मूल समस्याओं का समाधान किए बिना सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को निजी हाथों में सौंपना जनहित के विपरीत कदम होगा। संयुक्त मंच ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में पहले भी स्वास्थ्य संस्थानों के निजीकरण के प्रयास सफल नहीं रहे। वर्ष 2015 में अलीराजपुर जिला अस्पताल और जोबट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निजी संचालन मॉडल वापस लेना पड़ा था। वहीं वर्ष 2020-21 में जिला अस्पतालों के निजीकरण का प्रस्ताव भी व्यापक विरोध के कारण आगे नहीं बढ़ सका। वर्ष 2024-25 में भी जिला अस्पतालों के निजीकरण के प्रयासों का चिकित्सकों और स्वास्थ्य संगठनों ने विरोध किया था।
संयुक्त मंच ने सरकार से मांग की है कि 18 सामुदायिक भवनों के निजी करण को वापस ले
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