Rajendra Devray / Mon, Apr 7, 2025 / Post views : 218



9 दिनों तक 51 से अधिक जोड़ों के द्वारा हवन कुंड में बैठकर विश्व कल्याण की भावना से पर्यावरण एवं आने वाले समय में अच्छी बारिश की कामना के लिए करीब 5हजार से अधिक आहुति डालकर मंगल कामना की गई।
गायत्री शक्तिपीठ सिलोदा खुर्द के परिवाचित पंडित विक्रम पटेल ने बताया कि प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी नौ दिनों तक गायत्री माता की आराधना स्वरूप अनुष्ठान किया गया साथ ही प्रतिदिन यहां यज्ञ एवं संस्कार आयोजित किए गए थे। जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे एवं शामिल हुए। इसमें मुख्य रूप से गर्भ पूजन, नामकरण, अन्नप्राशन, जन्मदिन आदि संस्कार वैदिक मंत्र उपचार के साथ संपन्न करवाए गए।
पांच कुंडो पर हुआ हवन, 51 से अधिक जोड़े हुए शामिल
पंडित श्री पटेल ने बताया कि मंदिर परिसर में यज्ञशाला में बने पांच कुंडो पर प्रतिदिन अलग-अलग गांव से आए श्रद्धालुओं द्वारा शामिल होकर आहुतियां दी गई।कुल 9 दिनों में 51 से अधिक जोड़े शामिल हुए और करीब 5हजार से अधिक आहुतियां डालकर क्षेत्र में सुख समृद्धि व खुशहाली की कामना की गई।
गणगौर पर्व पर खंडवा में हुए हादसे पर दी गई श्रद्धांजलि
गणगौर पर्व के जवारे विसर्जन के दौरान खंडवा के कोण्दा गांव में कुएं में आठ लोगों की दर्दनाक मौत के बाद मंदिर परिसर में उनकी दिवंगत आत्माओं के लिए शोक सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि देते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए हवन कुंड में महामृत्युंजय मंत्र से आहुति प्रदान की गई।
अंतिम दिन इन्हें मिला हवन महा पूर्णाहुति का सौभाग्य
9 दोनों चले महायज्ञ के दौरान अंतिम दिन हवन एवं पूर्णाहुति का सौभाग्य दिलीप यादव, शिक्षक मोहनलाल राठौड़, मिथुन वर्मा पतलिया, अरुण पटेल सिलोदा, संजय जादौन बगड़ी, डॉ सुनील जायसवाल बगड़ी,गोविंद पटेल बछड़ावादा के द्वारा महा पूर्णाहुति संपन्न की गई। इस दौरान मंदिर समिति के मुख्य रूप से दिनेश बद्रीलाल वर्मा, अमित चंद पटेल, विनोद पटेल मुंडला, विक्रम पटेल, भरत पटेल, विनय पटेल, आदि उपस्थित थे।
विश्व के कल्याण के लिए होता है महायज्ञ
पंडित श्री पटेल नेश्रद्धालुओं को यज्ञ के महत्व को बताते हुए कहा कि प्राचीन काल से हवन और यज्ञ की परंपरा चली आ रही है। रामायण काल में भी इसका उल्लेख है। आधुनिक युग में लोग इन परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं वर्तमान समय में क्षेत्र की शांति खुशहाली वह पर्यावरण के संतुलन व अच्छी बारिश की कामना के लिए महायज्ञ का होना अति आवश्यक है। और इन्हीं उद्देश्यों को लेकर गायत्री परिवार गायत्री शक्तिपीठ सिलोदा खुर्द द्वारा महायज्ञ का आयोजन किया जाता है। यज्ञ से सुख समृद्धि व शांति मिलती है। इसमें शामिल होकर इसका लाभ लेने वाले लाभार्थी के घर में भी इसका असर देखने को मिलता है।
गायत्री शक्तिपीठ सिलोदा खुर्द में नौ दिनों तक चले महायज्ञ की पूर्णाहुति करते हुए श्रद्धालु।
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