Rajendra Devray / Thu, Apr 3, 2025 / Post views : 229
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बगड़ी/यज्ञात् भवति पर्जन्य, यज्ञ से प्रकृति शुद्ध होती है प्रकृति से पर्यावरण शुद्ध होता है।पर्यावरण शुद्धता से हम् स्वस्थ रहते है। खेत में नरवई ( खापा ) जलाने के धुए से प्रकति अशुद्ध होती है। पर वही अगर यज्ञ होता और उसका धुआ निकलता है तो प्रकृति शुद्ध हो जाती है।
उक्त प्रेरक उदगार यहां महोत्सव के दौरान प्रमुख यज्ञाचार्य पंडित विजय कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं के समक्ष यज्ञ हवन के महत्व को बताते हुए कहे।महोत्सव के द्वितीय दिवस् में यज्ञ पूजन के बाद भगवान को जल में से अन्न में विराजमान करने के बाद अरणि मंथन के माध्यम से वेद मंत्र के द्वारा अग्नि प्रकट करके उस अग्नि को यज्ञ में विराजमान किया गया एवं आहुति प्रारंभ की गई पाँच दिनो में 21 जोड़ों के द्वारा लगभग 2 लाख 51 हजार आहुति प्रदान की जाएगी
*हवन यज्ञ का महत्व बताया*
जब यह धरती बंजर थी तब इस धरती पर अन्न नहीं होता था बारिश नहीं होती थी तब भगवान के अवतार महाराज प्रथु ने 99 यज्ञ किए थे। जिससे इंद्र ने प्रसन्न हो कर वर्षा करना प्रारंभ की थी। उसके बाद ही यह भूमि उपजाऊ हुई
यज्ञ में जब पूजन हवन होता है तब देवता स्वयं आहुति लेने के लिए यज्ञ में अग्नि के रूप में विराजमान होते है। भगवान राम का आगमन भी संसार में हुआ है तो महाराज दशरथ ने पुत्रेष्ठी यज्ञ किया था।
*ऋषि मुनि यज्ञ के माध्यम से भगवान को प्राप्त करते थे*
तब यज्ञ में से खीर का प्रसाद प्रकट हुआ वही तीनों रानियो को खीर का प्रसाद दिया उस यज्ञ के प्रसाद से ही राम जी का त्रेतायुग में राम नवमी पर आगमन हुआ यज्ञ में बहुत शक्ति है पहले के समय में ऋषि मुनि यज्ञ के माध्यम से ही भगवान को प्राप्त करते थे भगवान का स्वरूप है यज्ञ।
*भगवान के नगर भ्रमण के साथ पूर्णाहुति होगी*
4 अप्रैल की सुबह देवता पूजन हवन के साथ रात्रि में बाबा श्याम के कीर्तन का आयोजन रखा गया है। जिसमें प्रसिद्ध भजन गायिका प्रिया वैष्णव एवं इंदौर की गोरी अग्रवाल, एवं इंदौर के भजन गायक दिव्यास पांडे बाबा श्याम के मंगलमय भजनों की प्रस्तुति देंगे। 5 अप्रैल की सुबह पूजन हवन अभिषेक के साथ भगवान का नगर भ्रमण होगा। इसके पश्चात रात्रि के 7:00 बजे सुंदरकांड का आयोजन होगा। 6 अप्रैल रवि पुष्य एवं अभिजीत मुहूर्त में भगवान की स्थापना के साथ हवन की पूर्णाहुति कर महाप्रसादी का वितरण किया जाएगफोटो
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