Rajendra Devray / Fri, Apr 4, 2025 / Post views : 218






बगड़ी/ग्राम तलवाड़ा में नवनिर्मित श्री राम मंदिर परिसर में गुरुवार 3अप्रैल को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हुआ। जिसमे कवियों ने अपनी शानदार रचनाओं से रात 2 बजे तक श्रोताओं को बांधे रखा। कवियों ने एक से बढ़कर एक काव्य रचनाओं की प्रस्तुति दी ।मांडू के प्रख्यात कवि पंकज प्रसून को अमेरिका को केडरब्रुक विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने डॉ मानद उपाधि मिलने पर हिंदू संगठन समिति द्वारा कवि को सम्मानित किया गया।
सबसे पहले देदला के कवि चेतन शर्मा में सरस्वती वंदना कर अपनी माँ नर्मदा पर लिखे रचना से दाद बटोरी उनके बाद भोपावर के कवि महेश दांगी ऊटपटांग में अपने चूटीले अंदाज़ से श्रोताओं को खूब हसाया।
*गीत मेरे राम तुमको नमन*
उसके बाद मांडू के कवि डॉ पंकज प्रसून जाट ने अपने गीतों से जो समाँ बांधा के तलवाड़ा के श्रोताओं ने उन्हें सर आँखों पर बैठा लिया। उन्होंने अपनी रचना *सदियों से प्रतीक्षा थी जिसकी आज आ रहा*
*ख़ुशियाँ मनाइये के राम राज्य आ रहा*और *सुप्रसिद्ध गीत मेरे राम तुमको नमन*
सुना कर लोगो की आँखे भीगा दी। इसी गीत के लिए *हाल ही में पंकज प्रसून को अमेरिका को केडरब्रुक विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने डॉ की मानद उपाधि से समानित किया जो पूरे धार जिले के लिए गर्व की बात है। तलवाड़ा की हिंदू संगठन समिति ने भी इस उपलब्धि प्रसून का सम्मान किया*,
*संस्कारों की महिमा न्यारी,देखी है तलवाड़ा में*
नागदा जंक्शन से आए कवि कैलाश सोनी सार्थक ने *संस्कारों की महिमा न्यारी,देखी है तलवाड़ा में* *मंदिर रघुवर का बनने से* *कण-कण इसका धाम हुआ* रचना से सबकी दाद बटोरी। धार के कवि शिव शैलेंद्र यादव ने अपने अनोखे अंदाज़ में *दुश्मन की छाती छलनी कर में वहाँ तिरंगा गाड़ आया* और *अरे डियर वालो कन्हैया से कह दो* सुना कर खूब तालिया बटोरी के कवि सम्मेलन को उचाई दी।
*इंसानियत सिखाने अब वह निकल पड़े*
भोपाल की कवियत्री पूजा भारती ने
*इंसानियत सिखाने अब वह निकल पड़े*
*दो दिन न जी सके जो इंसान की तरह*कविता सुना कर वाह वही लूटी अंत में कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे इंदौर के कवि कमलेश देव सहज ने
*जिन लड़कों के आगे पीछे लड़कियों के मेले लगते हैं*
*उन लड़कों के कुछ बरसों के बाद मेले में केले के ठेले लगते हैं*
जैसी रचना पढ़कर खूब हसाते हुए अपनी बेटी वाली कविता से कवि सम्मेलन का समापन किया ,तलवाड़ा में पहली बार हुए इस कविसम्मेलन की सफलता इस बात से साबित होती है के अंत तक उतने ही श्रोता और मात्र शक्ति उपस्थित थी। आभार समिति के श्याम जाट ने माना कवि सम्मेलन के सूत्रधार डॉ कवि पंकज प्रसून जाट थे ।
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