Rajendra Devray / Wed, Jan 7, 2026 / Post views : 301



परम पूज्य गुरुदेव श्रमण पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज जी के आशीर्वाद से बड़वानी में विराजित परम पूज्य श्रमण मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज के सानिध्य में पूर्ण विधि विधान और भक्ति भाव से पंडित नितिन झांझरी इंदौर नगर पुरोहित के निर्देशन में संपन्न हुआ आज प्रातः भगवान नेमीनाथ की अभिषेक के साथ शांतिधारा संपन्न हुई,उसके उपरांत उपरोक्त कार्यक्रम के लिए मंगल के सूचक ध्वजारोहण समाज के श्रेष्ठी परिवार द्वारा संपन्न हुआ,पश्चात सौधर्म ,महेंद्र,ईशान आदि इंद्र इंद्राणी ने भक्ति भाव ,श्रद्धा,और विवेक से शांति नाथ मंडल विधान, याग मण्डल विधान सम्पन्न किया इस अवसर पर मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज द्वारा भगवान को मंडल जी के समवशरण पर विराजमान किया, मंडल जी पर समाज के श्रावक श्राविका द्वारा श्रीफल और अर्ध समर्पित किए साथ ही मांगलिक क्रियाओं के साथ साथ विराजित सारे भगवान को मूल वेदी से अन्य वेदियों में विराजित किया गया ,श्रावक श्रेष्ठियों द्वारा प्राचीन वेदी से भगवान का उत्थापन कर अस्थाई वेदी पर शांतिधारा अभिषेक के साथ विराजित किए गए जिनको भगवान के गर्भ गृह के जीर्णोद्धार, और नए कमलासन पर शीघ्र ही विराजित किया जाएगा,इस अवसर पर समाज के महिला पुरूषों ने संकल्प स्वरूप वस्तुओं के त्याग का नियम भी लिया। ,विधान के पश्चात हवन संपन्न हुआ जिसमें समाज के महिला पुरुष और इंद्र इंद्राणी ने आहुतियां दी गई,यहां ये उल्लेखनीय है कि इस मंदिर को स्थापित हुए 99 वर्ष हो चुके है और 14 फरवरी को 100 वर्ष लग जाएगा इस 99 साल में भगवान पहली बार अपने मूल स्थान से हट कर उच्च कमलासन पर विराजित होंगे ,इस अवसर पर मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने बताया कि हमारा परम सौभाग्य है कि भगवान ने हमें इस कार्य के लिए चुन लिया,ये हम कुछ नहीं कर रहे ये सब जो करवा रहे है भगवान ही करवा रहे है, मुनि श्री ने कहा कि हम यह भावना रखते है कि सभी सुखी रहे सबके जीवन में सुख,शांति,समृद्धि और धर्म की वृद्धि हो ,निरोगी रहे प्रेम सौहार्द्र बना रहे इसलिए उच्च आसान पर बैठा रहे है ,ठीक मुहूर्त में भगवान को नए अस्थाई वेदी पर विराजित होते ही पूरा मंदिर भगवान के और मुनिश्री के जय जय कार से गूंज उठा।
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