Rajendra Devray / Tue, Apr 29, 2025 / Post views : 226
"पृथ्वी मनुष्य के आवश्यकता की पूर्ति कर सकती हे लालच का नहीं।"
शा उ मा वि बड़ावदा मे इको क्लब प्रभारी शांतिलाल झाला के नेतृत्व में "पृथ्वी दिवस "मनाया गया। इस साल की थीम "हमारी शक्ति,हमारा ग्रह"हे।
प्राचार्य गोविंद सिंह मालीवाड़ के द्वारापौधा रोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
पृथ्वी दिवस पर अंकित जायसवाल के नेतृत्व में चित्र कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।छात्र छात्राओं ने शानदार चित्र बनाकर पृथ्वी को बचाने का संदेश दिया।
विजेता शिवम पांचाल प्रथम,शगुन प्रजापत द्वितीय, यासिका जोशी तृतीय रहे।सभी विजेता के साथ प्रतिभागियों को भी पुरस्कृत प्राचार्य द्वारा किया किया।
अजय कुमार रावल व ईश्वर परमार ने 5 पौधों (आम,नीम,पीपल,जामफल,गुलमोहर)की पूरी जानकारी वाले QR कोड बनाए।
वाद विवाद का विषय विकास पृथ्वी के लिए लाभ कारी या हानि कारक।प्रहलाद पाटीदार पक्ष व शांतिलाल झाला ने विपक्ष में विचार रखे। बताया कि
पृथ्वी में सभी जीवों की आवश्यकता की पूर्ति की क्षमता है।
लालच को पूरा करने की नही।
पृथ्वी ही एक मात्र ग्रह है जिस पर जीवन संभव है।
जीवन के लिए सभी आवश्यक तत्व जैसे मिट्टी, हवा,पानी,भोजन,सूर्य, पेड़ पौधे,आदि मौजूद है। ये सभी मिलकर पृथ्वी को जीवन जीने ,प्रजजन, पोषण,के योग्य बनाते है।
पृथ्वी पर मनुष्य सबसे ज़्यादा दिमाग वाला जीव है।जैसे जैसे सभ्यता का विकास शुरू हुआ ।मनुष्य ने प्रकृति का अंधाधुंध उपयोग अपने लालच को पूरा करने के लिए शुरू किया।जिसके फलस्वरूप आज पृथ्वी पर पर्यावरण प्रदूषित हो गया।
हवा ,पानी,भोजन के सभी स्रोतों को प्रदूषित कर दिया।
हवा:- पेड़ पौधे की अंधाधुंध कटाई से जंगलों को काट कर गाँव व शहरों के साथ खेती करने लगा। जिसके कारण ऑक्सीजन की कमी,जंगली जीवो के शिकार , आवास नष्ट होने से खाद्यश्रंखला के कई जीव पृथ्वी से विलुप्त हो गए।जिसके कारण पर्यावरणीय जीवो में असंतुलन हो गया।प्रकृति के छोटे से छोटे जीव का भी प्रकृति में अपना महत्व होता है।
उदाहरण :- जैसे गिद्ध आज लगभग पूरी तरह से विलुप्त हो गया है।ये मेरे हुए जानवर को थोड़े समय मे खा कर साफ कर देते थे।इस कारण इसको प्रकृति का सफाई कर्मी भी कहते थे।
आज कोई भी गाय भेस आदि जीव मर जाने पर कई दिनों तक सड़कर बदबू मरते रहते है।
पानी:-"बिन पानी सब शून्य"
प्रदूषण के कारणआज किसी भी जलाशय नदी, तालाब,कुँए से पानी को ग्लास में भरकर नही पिया जा सकता है।
सभी मनुषयो,पेड़,पौधों,जीवों के जीवन के लिए पानी भी मत्वपूर्ण घटक है ।
पृथ्वी पर उपलब्ध पानी का मात्र 3%पानी ही पीने योग्य है। बाकी पानी समुद्र में खारा होने से मनुष्य के काम का नही है।
जो भी पीने योग्य पानी के जल स्त्रोत जैसे नदी,तालाब,कुँए,झरने,...आदि को अति दोहन व उद्योगीकरण, नगरीकरण,ने इनके पानी को दुसित कर दिया है।
मनुष्य का शरीर 70%पानी से बना है। दुसित पानी के उपयोग के कारण आज कई गम्भीर बीमारियां से मानव ग्रसित है।
आज दूध से महंगा पानी बोतल में बिक रहा है।
अंधाधुंद सिंचाई के कारण ट्यूब वेल 1000 से 1500 फिट तक जमीन की गहराई से पानी निकाल रहे है।इसमें कई प्रकार के सोलिकेट मिले होने के कारण सिंचाई से भूमि को बंजर बना रहे है।
फेक्ट्रियो का गंदा पानी,नगरों की गटरों का पानी,सीधे नदियों से होता हुआ तालाब आदि के द्वारा सभी जीवों को दूषित पानी पिनो को मजबूर है।
जवाबदार सिर्फ मनुष्य का लालच है।
भोजन:- पृथ्वी पर हर जीव को जीवन जीने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है।
लेकिन मनुष्य ने अपने लालच की पूर्ति के लिये व बिना उचित अनुचित का विचार किये अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिये कृषि रासायनिक खाद,दवाई,बीज,का उपयोग कर पूरे खाद्यसामग्री को जहरीला बना दिया।
सभी प्रकार के अनाज,फल,शब्जिया, जहरीली खाने के कारण आज कई गंभीर बीमारियों जैसे केंसर,हार्टअटैक,ब्रेन हेमरेज,शुगर,bp, कोलैस्ट्रोल,आदि बीमारियों से मानव त्रस्त हो चुका है।
फसलों पर दवाई के छिड़काव से मारिहुयी इल्ली व कीटो को दूसरे पक्षियों के खाने के कारण कई जीव मर गए।
आज कई जीवो को प्रजातियां विलुप्त हो गई है।
प्राकृतिक संसाधनों,ऊर्जा का ज्यादा उपयोग,ईंधन युक्त आवागन के साधनों,विद्युत ऊर्जा,कोयला,डीजल, पेट्रोल,प्राकृतिक LPG गैस,के ज्यादा उपयोग से कार्बन का ज्यादा उत्सर्जन होता है।
इसके कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ गया है।जिसके कारण समुद्रों का जल स्तर बढ़ गया है।समुद्र किनारे बसे कई सहर डूब गए है।और कई डूबने वाले है।
सोलर ऊर्जा के उपयोग से इसको कम किया जा सकता है।
उपसंहार :-मानव को पृत्वी को ग्लोबल वार्मिंग कम करने के लिए व "पृत्वी ग्रह में निवेश" करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का सदपुयोग करना होगा। आवश्यकता को कम करना होगा।
पानी की बचत करे।टपकते नल को रिपेयर करावे,खेती में सिंचाई के लिए ड्रिप,स्प्रिंकलर,आदि का उपयोग करे। बिजली के लिए सोलर प्लेटों से उत्पादन करे,।जितना जरूरत हो उतनी वाट का बल्ब लगावे,उपयोग के तत्काल बाद स्विच बंद कर दे। 5 स्टार रेटिंग के विद्युत उपकरण से पुराने उपकरणों को रिप्लेश करे।
भोजन को आवश्यकता अनुसार ही उपयोग में ले।व्यर्थ न ढोले,।
हवा के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाए।पेड़ पौधों से बारिश, पृथ्वी के तापमान में कमी ,जंगली जीवो का आवास ,लकड़ी,फल फूल,आदि के साथ साथ जंगली जीवो का आवास भी मिलता है।
आवश्यकता तो असीमित है।
जरूरतों को कम कर पृथ्वी को बचाकर में ही मानवता को बचाया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों व विद्यार्थियों को पृथ्वी बचाने की सफ़त दिलाई गई।
इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ शिक्षक
इस अवसर पर छात्र/ छात्राओं के साथ शिक्षक जाहिद शाह खान,अकील एहमद पठान,माया सोनी,प्रहलाद पाटीदार,अंतिम मौर्य,मोहन लाल सोनारतिया,हंसा बघेल,घनश्याम पाटीदार,कृष्णपाल त्रिपाठी,मुकेश बैरागी,निर्मला गहलोत,रेखा दड़ीग,सुरेश कुमार व्यास,जितेंद्र बग्गड़,गणेशराम आद्रा,महेश पाटीदार, ऋतु आद्रा,कृष्णचंद्र सक्सेना,विजय बोरीवाल,आदि उपस्थित थे।
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