Rajendra Devray / Tue, Jan 13, 2026 / Post views : 309
प्रतापगढ़ चतुर्थ दिवस में आज अत्यंत भावपूर्ण और ज्ञानवर्धक प्रसंगों का वर्णन किया गया। आज की कथा में सर्वप्रथम कश्यप मुनि की दो पत्नियों अदिति एवं दिति के प्रसंग का सुंदर वर्णन हुआ। तत्पश्चात कश्यप मुनि से संबंधित दिव्य प्रसंगों के माध्यम से सृष्टि की उत्पत्ति और देव-दानव परंपरा का विवेचन किया गया इसके पश्चात वामन भगवान के अवतार का प्रसंग आया कथा में बताया गया कि जनेऊ (उपनयन) संस्कार के समय दो बार भिक्षा ली जाती है एक गुरु के लिए और दूसरी राह खर्च (जीवन निर्वाह) के लिए।
आगे वामन भगवान और राजा बलि का अत्यंत मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। वामन भगवान ने राजा बलि से तीन पग भूमि की याचना की। भावपूर्ण भजन की पंक्तियाँ तेरे द्वार खड़ा भगवान, भक्त भर दे झोली” के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भगवान का स्मरण करने से सभी संकट दूर हो जाते हैं। कथा में गुरु शुक्राचार्य का प्रसंग, गंगा जी के प्रादुर्भाव की कथा तथा माता लक्ष्मी के पिता रत्नाकर के प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया गया। समस्त श्रोतागण कथा श्रवण कर भाव-विभोर हो गए और वातावरण भगवान की जय” के जयघोष से गूंज उठा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन