Rajendra Devray / Tue, Mar 18, 2025 / Post views : 219


नालछा :- रंगो के महापर्व होली,धुलेंडी और रंगपंचमी के त्योहारों को अपने अंदर समाएं फाल्गुन माह के प्रारंभ से लेकर शीतला सप्तमी तक फाग गीत गायन की अपने परिवार की कई पीढ़ियों और वर्षो पुरानी परंपरा का ग्वाल परिवार के वरिष्ठ और युवा साथ मिलकर निर्वहन कर रहे हे और अपनी पारिवारिक पारंपरिक विरासत को आगे बड़ा रहे हे श्री कृष्ण फाग मंडली के माध्यम से प्रतिदिन रात्रि 8 बजे ग्वाल वंशी एवं नंदवंशी परिवार के 50 से अधिक वरिष्ठ व युवा पूर्व से तय निर्धारित स्थान पर एकत्रित हो जाते हे और झांझ-मजीरा,ढोलक और डफली की मधुर धुन पर देर रात्रि तक फाग गीत का गायन कर रहे हे जिसमे कई अन्य समाज के साथियों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है फाग मंडली को गांव में ग्रामवासी जहा भी आमंत्रित करते है फाग मंडली के सदस्य वहा पहुंचकर फाग गीतों का गायन करते हे साथ ही गांव क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों पर भी फाग गीत गायन करने मंडली पहुंचती है फाग गीत गायन का उक्त आयोजन फाल्गुन माह के प्रारंभ से लेकर शीतला सप्तमी तक प्रतिदिन रात्रि में आयोजित किया जाता है परिस्थिति अनुसार सर्वसहमति से गीत गायन कुछ दिनों के लिए आगे भी बड़ा लिया जाता हे
वरिष्ठजनों के साथ युवाओं में बड़ रही रुचि,प्रतिदिन बड़ी संख्या में हो रहे शामिल
आज के आधुनिक दौर में जहां बच्चो का पूरा बचपन मोबाइल में गुम होकर रह गया हे और उनका अपने पारिवारिक संस्कार,अपनी संस्कृति और अपनी प्राचीन परंपराओं में रुचि लेना भी महज औपचारिकता ही लगता हे ऐसे दौर में वर्षो पूरानी परंपरा में युवाओं का विशेष रुचि लेना और फाग गीत का गायन करना बेहद सकारात्मक हे जहां भी फाग गीत गायन का कार्यक्रम रहता है वहा वरिष्ठजनों के साथ ग्वाल परिवार के युवाओं की लगभग 100 प्रतिशत उपस्थिती और कार्यक्रम के अंत तक मौजूदगी देखी जा रही हे वही युवाओं की मौजूदगी से कार्यक्रम का अपना एक अलग ही स्वरूप नजर आने लगता हे जो समाज के लिए सुखद संदेश भी है
ग्वाल परिवार के पूर्वजों ने अपने हाथों से लिखे थे 250 से अधिक फाग गीत,उन्ही गीतो का होता हे प्रतिदिन गायन
ग्वाल परिवार की कई पीढ़ियों से फाग गीत गायन की परंपरा रही हे जिसका निर्वहन आज भी अनवरत जारी हे सबसे रोचक जानकारी यह निकल कर आई की प्रथम पूज्यनीय भगवान श्री गणेश,आराध्य भगवान श्री कृष्ण-राधा महारानी,मां अंबे,प्रभु श्री राम-माता सीता,रामभक्त हनुमान,मीरा भक्ति और गुरुवर आदि पर आधारित जिन फाग गीतों का गायन फाग मंडली द्वारा किया जा रहा है वे सभी गीत ग्वाल परिवार के पूर्वजों के द्वारा अपने हाथो से लिखे गए हे ऐसे लगभग 250 से अधिक गीतों की गीत श्रंखला आज भी श्री कृष्ण फाग मंडली के पास सुरक्षित हे जिनका गायन फाग मंडली द्वारा प्रतिदिन किया जा रहा हे
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