Wed, 28 Oct 2026
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: मुख्यमंत्री मोहन' के राज में 'गाय' है बेहाल भूख और ठंड से गायो की मौत का तांडव जारी कुछ तो करो सरकार

मुख्यमंत्री मोहन' के राज में 'गाय' है बेहाल  भूख और ठंड से गायो की मौत का तांडव जारी कुछ तो करो सरकार
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मुख्यमंत्री मोहन' के राज में 'गाय' है बेहाल भूख और ठंड से गायो की मौत का तांडव जारी *वेदों में गाय का बड़ा महत्व लेकिन गौसमाधि की जगह खुले आसमान के नीचे फेक दी मृत गाये* काबरवा श्रीमद्भागवत के अनुसार, जब देवता और असुरों ने समुद्र मंथन किया तो उसमें कामधेनु निकली। पवित्र होने की वजह से इसे ऋषियों ने अपने पास रख लिया। माना जाता है कि कामधेनु से ही अन्य गायों की उत्पत्ति हुई।धर्म ग्रंथों में ये भी बताया गया है गाय में सभी देवता निवास करते हैं। गाय की पूजा करने से सभी देवताओं का पूजन अपने आप हो जाता है। भगवान श्रीकृष्ण भी गायों की सेवा करते थे। श्रीकृष्ण रोज सुबह गायों की पूजा करते थे और ब्राह्मणों को गौदान करते थे। हिन्दू धर्म में गौ सेवा का बड़ा महत्व हे। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किसानों का कर्ज माफ ओर प्रत्येक जनपद में 100 गायों के लिए गौ शाला ओर सेवा के संकल्प के साथ सरकार बनाई थी। ओर गौ शाला ओ को पंचायत को हैंड अवर कर के प्रतेक गाय के लिए 20 रु प्रतिदान के हिसाब से अनुदान दिया जा रहा है। लेकिन अधिकारियों की आंखों पर भ्रष्ट ओर काली पट्टी का होना आज गौ माता हो भुगतना पड़ रहा है। वर्तमान में भी मध्य प्रदेश की मोहन सरकार गौ वश और गौ पालन के लिए कई योजनाएं ला रही है लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही है जी हां हम बात कर रहे हैं मप्र नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के गंधवानी के ग्राम काबरवा की जहां पर सो गायों के लिए सरकारी कामधेनु अमृत गौशाला का निर्माण पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कार्य काल में किया गया था और लोकार्पण भी पूर्व वन मंत्री उमंग सिंघार के द्वारा किया गया था, लेकिन आज गौ शाला की जमीनी हालात कुछ और ही है। कांबरवा की कामधेनु अमृत गौ शाला के हाल बेहाल है, और यहां की गयो को देख कर हर इंसान की रूह कांप जाती हे, ओर जमीनी हकीकत तो ये हे कि गाय ठंड और भूख से मर रही है, तड़प रही है जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से भी मुखर रहे हैं। जिस देश में गाय को माता का दर्जा दिया जाता हे आज उसी देश की गो शाला के ये हाल चिंता का विषय है। ओर जहां मोहन यादव जैसे मुख्यमंत्री हे उस राज्य की शासकीय गौ शाला के ये हाल, मुख्यमंत्री खुद गौपालक गुवाली यादव समाज के आते हैं, बता दें कि आज जंगली जानवर की मौत को देख कर भी रूह कांप जाती हे, फिर गौ माता के साथ ऐसा व्यवहार, बड़ा शर्मशार हे, एक ओर मां समझ कर गांय कि सेवा की जाती व मृत्यु के बाद विधि पूर्वक संस्कार किया जाता है लेकिन काबरवां की कामधेनु अमृत गौ शाला में गयो की भूख और ठंड से मरने के बाद ऐसे ही गो शाला के पीछे खुले आसमान में फेक दिया और चिल कव्वे ओर कुत्तों के लिए छोड़ देते है। कामधेनु अमृत गौ शाला के चौकीदार ने बताया कि चारे के नाम पर सोयाबीन का चारा है जो पशु चाव से नि खा सकता है ओर ठंड भी अधिक है जिससे बीमार हो कर गाये मर गई थी ऐसा आए दिन होता है। गाय को हरा चारा खाने को मिले तो अच्छे से ओर पेट भर खाती है। हरे गिले चारे की कमी के कारण गए बीमार हो कर मर रही हैं। ओर मारने के बाद सचिव को सूचना दी थी तो बोले जो हर बार करते हैं वो कर दो, मेने मृत गाय को खींच कर पीछे खड्डे में डाल दी में अकेला करता भी किया पंचायत की तरफ से कोई मदत मिलती तो में खड्डा कर के दफना देता। वहीं आस पास के किसानों ने बताया कि आए दिन गौ शाला से छोटे बछडे भी क्षतिग्रस्त तार बाउंड्री से बाहर आ जाते है, जिससे फसलों को भी नुकसान हो ता हे यहां कोई भी देख रेख ठीक से नहीं करता है गौ शाला केवल एक चौकीदार के भरोसे छोड़ रखी है। *गौ शाला में वॉलबाउंड्री के नाम पर केवल तार की बाउंड्री ना कोई उचित व्यवस्था* कामधेनु अमृत गौ शाला के बाहर केवल तार की बाउंड्री हे वो भी टूट फुट हो गई है जिससे आए दिन छोटे बछडे आस पास के खेतों में घुस कर किसानों की फसल का नुकसान करते हैं। साथ ही साथ चारे भूसे वाले कमरे में गेट नहीं लगाया गया हे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया है, जिससे चोरी का डर भी रहता हे, चौकीदार ने बताया नि की लाइट की भी कोई व्यवसाय नहीं है अन्दर केवल एक लाइट हे, बाहर पूरा अधेरा ही रहता हे जिससे चोरों का डर भी रहता है, ना गर्मी में गयो के लिए पंखे हे, वही पास में शौचायल परिसर काफी समय से बन कर तैयार हे लेकिन उसमें भी कोई पानी ओर व्यवस्था नहीं है ना टाइल्स लगी है, काफी समय से अधूरा ही काम पड़ा हे, आखिर इतनी भी किया जल्दी थी कि अधूरी गो शाला का ही लोकार्पण करना पड़ा। एक साल में 50 से 60 ट्रॉली गोबर खाद की होती हे नीलामी गौ शाला के चौकीदार ने बताया कि एक साल में गायों से आवक के रूप में केवल गोबर खाद मिलता हे, जिसे हम इक्ट्ठा करते हैं और साल में एक बार बेचते है। जिसको आस पास के किसान 4000 रू ट्राली के भाव से खरीदते हैं। लेकिन पैसा कहा गया मुझे कोई जानकारी नहीं हे। *चारे की बढ़ गई दाम,सरकार केवल 20 रुपए देती* ग्राम के सरपंच ने बताई की मौजूदा समय में 11 रुपया किलो भूसा हो चुका है, लेकिन वह भी नहीं मिल रहा है, एक गाय पर लगभग 70 रुपए का खर्च आता है, लेकिन सरकार केवल 20 रुपए देती है,वह भी समय पर नहीं मिलते,शहर में स्थित गौशालाएं सामाजिक संस्थाओं की मदद से चल जाती हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की गौशालाओं की हालत खराब हो चुकी है। यहां कोई सहयोग ओर मदद नहीं मिलती है। *प्रदेश में ये है गौशालाओं की स्थिति* जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में अभी 2400 गौशालाएं चल रही हैं. इसमें से 600 एनजीओ को सौंपी गई हैं. बाकी ग्राम पंचायतें चला रही हैं, इन गौशालाओं में 3 लाख गौवंश है, गौशालाओं के लिए 15 रुपए नगद और 5 रुपए का सुदान कुल 20 रुपए हर रोज के हिसाब से सरकार द्वारा बजट दिया जा रहा है, लेकिन यह काफी कम है. सरकार को इसे बढ़ाकर 40 रुपए प्रतिदिन करना चाहिए. सरकार को बोर्ड का बजट भी 300 करोड़ करना चाहिए. अभी सिर्फ 170 करोड़ का बजट ही मिल पाया है, यह राशि बढ़ाई जानी चाहिए। *इनका कहना....* में आज बाहर हु ओर मुझे मृत गायों के बारे में कोई जानकारी नहीं है, ओर सचिव ओर चौकदार ने मुझे कोई बात नहीं बताई, गयो के लिए सोयाबीन का चारा हे, पानी की पर्याप्त मात्रा है, और गाय को ऐसे फेकना गलत हे इसके लिए में शर्मशार हु, में तुरंत जाकर खड्डा करवा कर मिटटी में गढ़वा दुगा। दोबारा ऐसा नहीं होगा। सरपंज ने सचिव पर आरोप लगाते हुए कहा कि में गांव का ओर गौ शाला का विकास करना चाहता हु लेकिन सचिव सहयोग नहीं करना चाहता हे। मनोहर धार्वे (सरपंज पति) ग्राम पंचायत काबरवा सचिव से कॉल पर बात हुई तो सचिव ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मुझे भी इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं है मैं जब सुबह गो शाला गया था तो मुझे चौकीदार ने कोई सूचना नहीं दी, ओर गौ शाला में 20 रु प्रति गाय के हिसाब से आता हे वो भी समय पर नहीं आ रहा है,

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