Rajendra Devray / Sun, Oct 26, 2025 / Post views : 314



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रिपोर्टर कांतिलाल शर्मा नालछा*
नालछा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रविवार को नगर में ऐतिहासिक पथ संचलन निकला। रिमझिम बारिश की फुहार के बीच 1हजार से अधिक स्वयंसेवक कदम ताल करते हुए नगर के मार्ग से निकले। संचलन में छोटे से लगाकर बुजुर्ग तक बड़े उत्साह के साथ शामिल हुए संचलन की विशेषता यह रही कि इसमें पांच से अधिक परिवार के स्वयंसेवक अपनी तीन पीढ़ी यानी की दादा पुत्र व पोता एक साथ गणवेश में शामिल होकर मिसाल कायम की इधर 200 से अधिक स्थानों पर संचलन में शामिल स्वयं सेवकों का स्वागत कर उत्साह बढ़ाया।
पथ संचलन को लेकर नालछा नगर में एक माह से तैयारी की जा रही थी।इसी का परिणाम रहा कि नगर में ऐतिहासिक संचलन निकाला गया तेज बारिश ने भी स्वयंसेवकों का उत्साह कम नहीं होने दिया सुबह यहां के सांदीपनी स्कूल परिसर में सभी स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में अनुशासित पंक्तियों में एकत्रित हुए और एक साथ कदमताल करते हुए नगर की ओर निकल पड़े। यह संचलन नगर के विभिन्न मार्गो से गुजरा।
*3.5 किलोमीटर की दूरी फूलों से पटी सडके*
नगर में संचलन को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला स्वयं सेवकों ने करीब 3:5 किलोमीटर की दूरी तय की इस दौरान नगर में समाजिक, धार्मिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के द्वारा करीब 200 से अधिक स्थानों पर फूलमालाओं एवं पुष्पवर्षा से स्वयंसेवकों का स्वागत किया गया। पूरी सड़क फूलों से पट गई थी।
*इन मार्गो से निकला संचलन*
पथ संचलन सांदीपनि विद्यालय से प्रारंभ होकर मां काली मंदिर, बस स्टैंड, सब्जी मंडी, ग्वाल मोहल्ला, कुशवाहा चौपाटी, कुमार मंडी, सुभाषचंद्र बोस मार्ग, चंद्रशेखर आजाद मार्ग, मांडू रोड होते हुए पुनः सांदीपनि विद्यालय पर संपन्न हुआ। घोष वाहिनी, ध्वज वाहिनी एवं अन्य वाहिनियों की अनुशासित पंक्तियों ने नगरवासियों में उत्साह और गर्व का वातावरण बनाया।
*संघ का यह सौवां वर्ष सौभाग्य और संकल्प का क्षण*
मुख्य वक्ता विभाग कार्यवाह अरविंद चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू समाज के संगठन में केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व का कल्याण निहित है।
उन्होंने कहा —हिंदू संस्कृति ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का संदेश देती है। संघ का यह सौवां वर्ष सौभाग्य और संकल्प का क्षण है। संघ केवल संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक जीवन्त प्रक्रिया है, जिसने शिक्षा, सेवा, संस्कृति, सामाजिक जागरण और राष्ट्र रक्षा के हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी है।”
उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य एवं स्वभाव जागरण जैसे पंच परिवर्तन विषयों पर गंभीरता से कार्य करें।मंच पर श्री श्री 108 महंत प्रेमदास जी महाराज, एवं खंड संघचालक सुरेश जी निनामा उपस्थित रहे।
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