अंजड:- दादा गुरु के नगरागमन पर पूरा नगर नर्मदे हर के जयकारों से गूंज उठा व पूरा नगर नर्मदा मैया की भक्ति में लीन नजर आया।
दादा गुरु के नगर आगमन पर नगर की जनता ने पालक फावड़े बिछाकर संतश्री का आत्मीय भाव से स्वागत किया।
संत दादा गुरु जी महाराज का गुरुवार को सुबह 11 बजे ठीकरी रोड स्थित गायत्री मन्दिर चौराहे से नगरागमन हुआ। जहां सैकड़ो भक्तों ने उनकी आगवानी कर पुष्प वर्षा से स्वागत किया। उनके साथ लगभग 2 हजार परिक्रमावासियों का जत्था भी मौजूद रहा।
नर्मदा मैया की पैदल परिक्रमा के साथ सबसे पहले कलश आया जिसे नगर परिषद अध्यक्ष मांगीलाल मुकाती ने अपने सर पर धारण कर नगवासियो की और से पद यात्रियों की आगवानी करि।
दादा गुरु को ढोल व डीजे पर भजनों की धुन पर नाचते थिरकते हुए शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण करवाया जो अस्पताल चौक, भावसार मोहल्ला, जटाशंकरी चौक, सराफा बाजार, बसस्टैंड से होते हुए बड़वानी रोड स्थित धनोरा पुनर्वास में यादव धर्मशाला पहुँची। दादा गुरु का नगर भर में जगह-जगह पुष्प वर्षा व उनकी आरती उतार कर आत्मीय स्वागत किया गया।
धनोरा पुनर्वास स्थित राधाकृष्ण मन्दिर में दादा गुरु ने पूजा अर्चना कर भक्तों के बीच करीब दो घण्टे यहां विश्राम किया इस बीच हजारो भक्तों ने उनका चरण वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
यादव धर्मशाला प्रांगण में सेवादरो द्वारा भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई थी व लगभग 2 हजार से अधिक परिक्रमवासियो व भक्तों ने भोजन प्रसादी ग्रहण करि। उसके बाद उनका काफिला बड़वानी की और रवाना हो गया।
1850 से अखण्ड निराहार:-
दादा गुरु के साथ चल रहे परिक्रमा प्रभारी वेदांश तिवारी ने बताया कि दादा गुरु 1850 दिनों यानी 5 साल से अखण्ड निराहार है इन पांच सालों में नर्मदा जल के अलावा कुछ भी ग्रहण नही किया। तथा दादा गुरु नर्मदा मैया की पैदल यात्रा के दौरान केवल एक ही बार संध्या आरती के बाद नर्मदा मैया का जल वो भी चरणामृत के रूप में थोड़ा सा ही ग्रहण करते है।
दादा गुरु की चौथी परिक्रमा:-
यात्रा प्रभारी तिवारी ने बताया कि दादा गुरु की नर्मदा मैया की यह चौथी पैदल परिक्रमा है उन्होंने 5 नवम्बर से ओंकारेश्वर से यात्रा शुरू करि तथा बुधवार को अब तक कि यात्रा का सबसे लंबा रूट रहा जो फतियापुर से बड़वानी तक लगभग 35 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया।
यात्रा प्रभारी तिवारी ने बताया कि दादा गुरु के साथ श्वान सिद्धू भी पैदल परिक्रमा कर रहा है उसकी भी दादा गुरु के साथ यह चौथी परिक्रमा है।
प्रकृति पर्यावरण व सनातम धर्म का सरंक्षण:-
दादा गुरु की पैदल परिक्रमा का मुख्य उद्देश्य धर्म, धरा, धेनु (गौमाता) एवं नर्मदा मैया तथा प्रकृति पर्यावरण का सरंक्षण करना है तथा आमजनो में सनातन धर्म, धरती माता, गौ माता, नर्मदा मैया व पर्यावरण के प्रति उनकी रक्षा का भाव आये व उन्हें सहेज कर रखने हेतु आमजनो में जनजागरण करना है।
यात्रा के साथ क्षेत्र व जिले के विभिन्न प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्यजनो तथा प्रबुद्ध वर्ग के लोगो का हुजूम मौजूद रहा।
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