Rajendra Devray / Sun, Nov 2, 2025 / Post views : 310


माताजी के मंगल बिहार पर सभी समाज जन ने अपने बहते आंसुओं से मंगल विदाई दी, माताजी के प्रति सभी को इतना अनुराग और मोह हो गया था कि उन्हें छोड़ने का किसी का मन नहीं कर रहा था,माताजी ने समझाया कि साधु तो बहते पानी के समान है आज यहां सांझ है तो कल का सवेरा कही और होता है ,चातुर्मास में ही जैन संत एक जगह विश्राम करके धर्म साधना करते है ,।
समाज जन ने बड़े भारी और दुखी मन से विदाई दी ,
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