Wed, 28 Oct 2026
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: बड़वानी स्वास्थ्य विभाग ने शीत लहर के संबंध में जारी की एडवाईजरी 05 जनवरी 2025/शीतलहर के कारण जन-मानस में शारीरिक क्षति एवं विषम परिस्थितियों में मौत की भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता

बड़वानी स्वास्थ्य विभाग ने शीत लहर के संबंध में जारी की एडवाईजरी  05 जनवरी 2025/शीतलहर के कारण जन-मानस में शारीरिक क्षति एवं विषम परिस्थितियों में मौत की भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता
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स्वास्थ्य विभाग ने शीत लहर के संबंध में जारी की एडवाईजरी बड़वानी 05 जनवरी 2025/शीतलहर के कारण जन-मानस में शारीरिक क्षति एवं विषम परिस्थितियों में मौत की भी संभावना होती है। प्रदेश में शीतलहर का प्रकोप प्रायः माह दिसंबर व जनवरी में प्रतिवेदित होती है जब कुछ प्रादेशिक क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 5-7 डिग्री सेल्सियस दर्ज होता है। ऐसी स्थिति में संवेदनशील समूह विशेषकर 65 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्धजन, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे, दीर्घकालिक हृदय अथवा श्वसन रोगों से पीड़ित व्यक्ति, बेघर व्यक्ति, निर्माण स्थल व खुली जगहों पर कार्य करने वाले श्रमिक, सड़क पर रहने लोग, खुले क्षेत्रों में व्यवसाय करने वाले छोटे व्यवसायियों द्वारा शीतलहर के दौरान विशेष सतर्कता बरतना आवश्क है। राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण द्वारा जारी की गई है ताकि तदानुसार जिलों में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके। ज्ञातव्य हो कि शीत लहर एक मौसम संबंधी घटना है जिसमें सतह के पास हवा के तापमान में तेज गिरावट आती है, जिससे तापमान बेहद कम हो जाता है. वायुदाब एवं हवा की गति में तेज वृद्धि होती है तथा जो पाला अथवा बर्फ जमने जैसी मौसमी घटनाएं जुड़ी होती है। शीत लहर से संबंधित निम्न तथ्यात्मक जानकारी- 1. प्रदेश में शीत लहर का प्रकोप प्रायः माह दिसम्बर-जनवरी में परिलक्षित होता है। 2. शीत लहर का स्वास्थ्य पर प्रभाव अत्याधिक ठंड से समुचित बचाव न करने पर जैसी शीत होना अथवा विषम परिस्थिति में मृत्यु की भी संभावना होती है। 3.लंबे समय तक ठंडे तापमान के संपर्क में रहने पर शारीरिक गर्मी व संग्रहित ऊर्जा में कमी होती है, जिससे शारीरिक तापमान और भी कम हो जाता है। 4. हाईपोथरमिया के लक्षण कंपकंपी थकावट या बहुत अधिक कमजोरी महसूस होना भ्रम हाथों का लड़खड़ाना वयस्क स्मृति हानि अस्पष्ट वाणी उनींदापन शिशु चमकदार लाल ठंडी त्वचा बहुत कम ऊर्जा होना हाईपोथरमिया होना चिकित्सकीय आपात स्थिति होती है। ऽ हाईपोथरमिया से पीड़ित व्यक्ति को किसी गरम कमरे अथवा आश्रय में ले जायें और कपड़े बदलें ध् गीले कपड़े उतार दें। ऽ तत्काल पीड़ित व्यक्ति को सूखे कंबल, कपड़ा, तौलिया, चादर आदि के सूखे परतों में लपेटें। ऽ शारीरिक तापमान में वृद्धि हेतु गरम पेय पदार्थ दें परन्तु मादक पेय का सेवन न कराए। बेहोश व्यक्ति को पेय पदार्थ न दें। शारीरिक तापमान बढ़ने के पश्चात पीड़ित व्यक्ति को सूखा रखें व उसके शरीर, सिर तथा गर्दन को गर्म कंबल में लपेटें। ऽ पीड़ित व्यक्ति को यथाशीघ्र चिकित्सकीय देखभाल हेतु निकटस्थ अस्पताल में ले जायें। ऽ गंभीर हाइपोथर्मिया से पीड़ित व्यक्ति बेहोश हो सकता है जिससे उसकी नाड़ीया साँस की गति धीमी हो जाती है ऐसी स्थिति में, तत्काल आपातकालीन सहायता प्राप्त की जाए। लंबे समय तक ठंड के संपर्क में रहने से त्वचा पीली, सख्त, सुन्न पड़ सकती है तथा शरीर के खुले हिस्सों जैसे उंगलियाँ, पैर के पंजें, नाक अथवा कानों पर काले छाले पड़ सकते हैं जो प्रायः शीतदंश के लक्षण होते हैं। शीत लहर के दौरान क्या करें एवं क्या न करें - ऽ मौसमी पूर्वानुमान हेतु स्थानीय रेडियो, टीवी व समचार पत्रों से जानकारी प्राप्त करें। ऽ पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े रखें तथा कई परतों में वस्त्र पहनें। ऽ शीत लहर के दौरान सर्दी-खांसी होना, नाक बहना, नाक से खून आने आने जैसी कई रोग की संभावना बढ़ जाती है जिसके लिए यथाशीघ्र चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त करें। शीत लहर के दौरान ठंडी हवा के संपर्क से बचें एवं यथासंभव घर के अंदर रहें और कम से कम यात्रा करें। ऽ सिर, गर्दन, हाथों और पैरों को अच्छी तरह से ढकें। ठंड से बचाव हेतु टोपी-मफलर का इस्तेमाल करें तथा वॉटरप्रूफ जूतों का उपयोग करें। ऽ पर्याप्त रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए संतुलित आहार व विटामिन-सी युक्त फल और सब्जियों का सेवन करें। नियमित रूप से गरम व तरल पेय पदार्थ पिए। वयोवृद्ध नागरिक, बच्चों, अकेले रहने वाले पड़ोसियों विशेषकर बुजुर्गों का ध्यान रखें। आवश्यक आपूर्ति एवं पेय जल का भण्डारण करें। ऽ शीत लहरों के संपर्क में आने पर, हाथ-पैर की उंगलियों, कानों के लोब और नाक के सिरे पर सुन्नता, सफेद या पीलापन जैसे शीतदंश के लक्षणों को पहचाने व तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लें। ऽ कंपकंपी आना, बोलने में कठिनाई, नींद आना, मांसपेशियों में अकड़न, साँस भारी होना, अत्याधिक कमजोरी, बेहोशी जैसे लक्षण हो सकते है एवं चिकित्सकीय आपात स्थिति को भांपते हुए तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लें एवं निकटस्थ अस्पताल से संपर्क करें। ऽ शीत लहर से बचाव हेतु जन-जागरूकता के लिए समस्त अधिष्ठाता, चिकित्सा महाविद्यालय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा मैदान कर्मीयों को लक्षण, बचाव तथा क्या करे या क्या ना करे के बारे में बताये।

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