Rajendra Devray / Wed, Dec 3, 2025 / Post views : 327


आज मंदिर पर कलश स्थापना के साथ नव दिवसीय पंचकुंडा त्मक शिव शक्ति महायज्ञ की पूर्णाहुति और महा प्रसादी के साथ होगा समापन
नालछा /नालछा स्थित टेलन टेकरी (गुरु पर्वत) पर प्राचीन श्री हिम कुंडेश्वर महादेव मंदिर एवं श्री टनाटन हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय पंच कुंडात्मक श्री शिव-शक्ति महायज्ञ एवं शिव हनुमान मंदिर शिखर प्रतिष्ठा एवं भागवत कथा महोत्सव के तहत बुधवार को संत महात्माओं की मौजूदगी में वैदिक मंत्रों के साथ अभिजीत मुहूर्त में शिखर प्रतिष्ठा की गई ओम शिव जय शिव एवं जय जय श्री राम के जय कारों के जय घोष से पूरा परिसर गूंज उठा। इधर रात्रि में सुंदरकांड व मंगल में भजनों पर देर रात तक श्रद्धालु झूमते रहे।
यह आयोजन अनंत विभूषित बैकुंठ धामवासी संत श्री श्री 1008 श्री सर्वेश्वरदास महाराज (श्री रामपालकी सरकार) एवं महंत श्री श्री 1008 हर गोविंदपुरी महाराज (श्री खेरेश्वर महादेव, राजस्थान) की दिव्य अनुकंपा से तथा महंत श्री श्री 1008 श्री राजेन्द्रपुरी महाराज (जुग्गा वाले बाबा), रामपालकी सरकार के कृपा पात्र परमशिष्य महंत श्री श्री 108 प्रेमदास जी महाराज (नीतू बाबा) बाबा के सानिध्य में संपन्न हो रहा है।
वैदिक मंत्रों के साथ शिखर प्रतिष्ठा
महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को संत–महात्माओं और ब्रह्मचारियों की पावन उपस्थिति में मंदिर की शिखर प्रतिष्ठा वैदिक विधि–विधान से सम्पन्न हुई।यज्ञ आचार्य पंडित राकेश शास्त्री द्वारा वैदिक मंत्र के साथ पूजन प्रक्रिया करवाई गई प्रतिष्ठा के दौरान वातावरण “ॐ शिव जय शिव”, “जय जय श्री राम” तथा “हर हर महादेव” के गगनभेदी जयघोषों से गूंज उठा। शंख–ध्वनि, नगाड़ों और मंत्रोच्चारों से पूरा परिसर शिवमय और राममय प्रतीत हो रहा था। शिखर प्रतिष्ठा के पश्चात भक्तों ने महाप्रसाद का लाभ लिया और मंदिर परिसर में दिनभर भजन–कीर्तन, कथा श्रवण तथा आस्था से परिपूर्ण धार्मिक गतिविधियाँ जारी रहीं।
मंदिर निर्माण आध्यात्मिक चेतना के स्रोत होते हैं
भागवत कथा के छठे दिन महायज्ञ के दौरान भागवत कथा व्यास पंडित कमल किशोर शर्मा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंदिर निर्माण के आध्यात्मिक महत्व, यज्ञ की आवश्यकता और धर्म के विस्तार में उसकी भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना के स्रोत होते हैं। पंच कुंडात्मक महायज्ञ, देव स्थापना और शिखर प्रतिष्ठा जैसे अनुष्ठान मंदिरों में दिव्यता स्थापित करते हैं तथा जन–जन के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
प्रसिद्ध भजन गायक अमित पाटीदार धामनोद, संकट मोचन सुंदरकांड मंडल नालछा, चतुर्भुज श्री राम रामायण मंडल मांडव के द्वारा सुंदरकांड पाठ को अर्थ सहित और मधुर भजनों पर प्रस्तुत किया। इसके एक दिन पूर्व प्रसिद्ध भजन गायक अमित धुर्वे के भजनों पर देर रात तक श्रद्धालु झुमते रहे।
इन संतों की रही मौजूदगी
आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में संतों की मौजूदगी रही है इसमें मुख्य रूप से महामंडलेश्वर श्री 1008 श्री अयोध्यादास कोटेश्वर, महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 दयारामदास पीपलखुटा, श्री बाबा श्री महंत शबालकृष्णदास महाराज लोहा लंगड़ी वाले (साइलेंट बाबा) उज्जैन, श्री आनंद दास महाराज त्यागी इंडोनेशिया, मनीषदास महाराज अवलाई, श्री खड़खड़ बाबा महा त्यागी राजस्थान, श्री यमराजदास छत्रिबाग इंदौर, महामंडलेश्वर श्री नितिनदास महाराज इंदौर, श्री लालदास बाबा मक्सी, श्री विकासदास महाराज गौतमपुरा, श्री पूनमदास उदासीन गौतमपुरा, श्री राहुल महाराज (हरि मंदिर) चिकलाना, संपूर्ण मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, अयोध्या, प्रयागराज, काशी, नासिक, त्रंबकेश्वर, हिमाचल प्रदेश, बंगाल, नेपाल सहित संपूर्ण भारत से कई सिद्ध पीठों, मठों से संत महंत पहुंचे। उक्त जानकारी पुजारी श्री बजरंगदास जी महाराज के द्वारा दी गई
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