अंजड:- अवधूत दादा गुरुजी महाराज नर्मदा पदयात्रा पर निकले है, शनिवार को सुबह 10:30 बजे उनका नगर आगमन हुआ। ठीकरी रोड स्थित बालाजी हनुमान मंदिर से भक्तों द्वारा दादा गुरु को ढोल नगाड़ों के साथ शोभायात्रा के रूप में लेकर नगर में स्थित अन्नपूर्णा मांगलिक भवन पहुँचे। अन्नपूर्णा मांगलिक भवन में उनके साथ चल रहे करीब 600 से अधिक नर्मदा परिक्रमा वासियों के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था भक्त मण्डल द्वारा की गई थी।
अन्नपूर्णा मांगलिक भवन में करीब दो घण्टे रुकने के बाद अवधूत दादा गुरु महाराज का काफिला दोपहर 12:30 बजे नगर के सराफा बाजार व बसस्टैंड से होते हुए बड़वानी की और रवाना हो गया।
इस बीच नगर के गणमान्यजनों एवं बड़ी संख्या में भक्तों ने दादा गुरु महाराज के दर्शन लाभ लिए व जगह-जगह रास्तेभर नगरवासियों ने दादा गुरु की आरती उतारी व पुष्पवर्षा कर दादा गुरु एवं नर्मदा परिक्रमा वासियों का स्वागत किया।
इस दौरान पूरा नगर नर्मदा मैया की भक्ति में डूबा नजर आया।
दादा गुरु महाराज ने भक्तों का करवाया भोजन:-
अन्नपूर्णा मांगलिक भवन में दादा गुरु महाराज द्वारा भोजनशाला का अवलोकन किया तथा भोजन प्रसादी ग्रहण कर रहे भक्तों को अपने हाथों से भोजन करवाया जिससे भक्तजन भाव विभोर हो गए।
श्वान सिद्धू की अद्भुत भक्ति:-
दादा गुरु के साथ चल रहे सेवादारों ने बताया कि दादा गुरु महाराज के साथ चल रहे श्वान सिद्धू अपनी तीसरी नर्मदा परिक्रमा कर रहा है। जिसका नाम दादा गुरु महाराज ने सिद्धू रखा है।
सेवादारों ने बताया कि करीब तीन वर्ष पूर्व श्वान सिद्धू पैदल नर्मदा परिक्रमा के दौरान दादा गुरु के काफिले में शामिल हुआ था जो अभी तक निरन्तर दादा गुरु के साथ रह रहा है। और सिद्धू प्रतिदिन करीब 20 से 30 किलोमीटर दादा गुरु के साथ पैदल यात्रा करता है।
तथा कई मन्नतधारी सिद्धू के कान में अपनी मनोकामना बोलते है तो उनकी मनोकामना भी पूर्ण हो रही है।
श्वान सिद्धू की भक्ति देख लोग उसको प्यार से दुलार करते है तथा उसके हाथ पांव भी दबाते है। सिद्धू भोजन में दूध रोटी या दालबाटी खाता है।
चार साल से निराहार रहकर कर रहे पदयात्रा:-
सेवादारों ने बताया कि निराहार अवधूत दादा गुरु जी महाराज ने चार साल पूर्व से अन्न का त्याग कर दिया था और चार साल से अधिक समय से सिर्फ नर्मदा मैया के जल पर ही आश्रित है। पदयात्रा के दौरान नर्मदा का जल भी ग्रहण नही करते है सिर्फ वायु ग्रहण कर रहे है और शाम की आरती के बाद ही नर्मदा मैया का समिति मात्रा में जल ग्रहण करते है। तथा अबतक दादा गुरुजी महाराज 3 लाख किलोमीटर की पदयात्रा कर चुके है।