: डग कस्बे के श्री राम जानकी कुण्ड के मंदिर प्रांगण चल रही नो दिवसीय श्रीमद दैवीय भागवत कथा में उत्तम स्वामी ने कहा कथा से जीवन की सारी व्यथा दूर होती है
Rajendra Devray
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Tue, Dec 31, 2024
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डग 30 दिसम्बर । डग कस्बे के श्री राम जानकी कुण्ड के मंदिर प्रांगण चल रही नो दिवसीय श्रीमद दैवीय भागवत कथा एवं लक्ष्मीनारायण यज्ञ के छठे दिन सोमवार को तुलसी जन्म, शालीग्राम,52 शक्ति पीठो,शिव पार्वती की कथा के प्रसंग में महत्व व महिला का वर्णन किया।
श्रीमद दैवीय भागवत कथा के छठे दिन एक दिवसीय यजमान परिवार के रमेश चन्द प्रधान, दिलीप प्रधान व प्रधान परिवार एवं श्यामबिहारी सोनी के द्वारा श्रीमद दैवीय भागवत एवं व्यास पीठ की पूजा अर्चना की गई।जिसके पश्चात महामंडलेश्वर महर्षि उत्तम स्वामी जी महाराज के मुखारविन्द से कहा कि
मनुष्य पूरा जीवन उसकी इच्छा से नही चलता वह हरि इच्छा से ही चलता है लेकिन परमात्मा ने एक अधिकार दिया हमको स्वेच्छा से उसका नाम साधना है तथा कहा कि नित्य नियम से दीपक लगाकर ईश्वर का ध्यान कर साधना करने से मनुष्य के जीवन की दरिद्रता समाप्त होती है। तथा शंकर पार्वती के विवाह प्रसंग में
शंकर को शांति कल्याण का प्रतिरूप बताया है तथा कहा कि आपका हृदय में दूसरों के प्रति द्वेष रखना बंद करो जहरीला सांप एक बार काट ले तो एक जन्म खत्म करता है लेकिन द्वेष रूपी जहर आप अपने हृदय में रखोगे तो आप आपके हजारो जन्म बिगाड़ देंगे तथा कहा कि समाज मे श्रेष्ठ कार्यो के लिए साधक होना चाहिए बाधक नही बनना चाहिए एवं परमात्मा को प्रसन्न करना है तो माला का जाप करे आपका जीवन मालामाल हो जाएगा ।तथा कथा दौरान महर्षि उतमस्वामी जी ने 52 शक्ति पीठ है जिसमें 42 भारत, 10 विदेशों में है जिनकी महिमा एवं महत्व का वर्णन किया तथा कहा जादू, टोन टोटके, उपायों बताने वाले लोगो से दूर रहकर अंध भक्त नही नारायण एवं ईश्वर के प्रति अंधी भक्ति करो कथा में तुलसी का महत्व बताते कहा कि सारे धर्म में श्रेष्ठ धर्म सनातन धर्म है इसलिए आंगन में तुलसी हो शालिग्राम हो संध्या के समय दीपक, अगरबत्ती अवश्य लगाए कथा में शिव पार्वती विवाह प्रसंग में शिव पार्वती की बारात में सजीव पात्र बनाकर धूम धाम से बारात निकालकर प्रसंग मनाया गया । इस दौरान भजनों पर महिला पुरुषों ने जमकर नृत्य किया कथा सुनने के लिए डग एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से आये सैकड़ों की संख्या में महिला पुरुषों ने कथा का श्रवण किया। कथा के पश्यात महाआरती कर प्रसादी वितरित की गई।