Rajendra Devray / Wed, Oct 29, 2025 / Post views : 310




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समय है कि युवा इन पोषक अनाजों को आधुनिक फूड प्रोसेसिंग तकनीक के साथ जोड़कर नए उत्पाद, नए ब्रांड और नए रोजगार अवसर तैयार करें।"
उन्होंने आगे कहा कि MSME मंत्रालय उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं चला रहा है, जिनके माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण, ऋण सहायता, मेटरशिप और मार्केट लिंकिंग की सुविधाएँ दी जा रही है। उन्होंने प्रतिभागियों से आहवान किया कि वे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बाजरा, कोदो, कुटकी, ज्वार, रागी आदि मिलेट्स से हेल्दी स्नैक्स, रेडी-टू-कुक उत्पाद एनर्जी बार और न्यूट्री फूड तैयार करें, जिससे किसानों की आय बढ़े और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिले।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को MSME योजनाओं, स्टार्टअप पंजीकरण प्रक्रिया, और फूड प्रोसेसिंग उद्योग में तकनीकी मानकों
की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम के विशेष वक्ता श्री यश सेठी, ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा जागरूकता हर उद्यमी के लिए अत्यंत आवश्यक है। ऑनलाइन लेनदेन और डिजिटल मार्केटिंग के साथ-साथ साइबर क्राइम से बचाव की जानकारी होना भी उद्यमिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।'
उन्होंने बताया कि अपना उद्योग स्थापित करने के लिए युवाओं को लोन प्रक्रिया और सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुद्रा लोन योजना, स्टैंडअप इंडिया, तथा MSME क्लस्टर डेवलपमेंट योजना जैसी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
विशेष वक्ता ने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से युवा बिना किसी बड़ी पूँजी के अपना लघु या मध्यम उद्योग आरंभ कर सकते हैं। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मिलेट्स आधारित फूड प्रोसेसिंग उद्योग भविष्य की बड़ी संभावनाओं से जुड़ा हुआ क्षेत्र है, जिसमें पारंपरिक कृषि और आधुनिक तकनीक का समन्वय आवश्यक है। 'सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर यदि युवा सकारात्मक सोच, नवाचार और गुणवत्ता पर ध्यान दें, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकते हैं।
कार्यशाला के दौरान MSME विशेषज्ञों द्वारा उद्यम पंजीकरण, वित्तीय सहायता की प्रक्रिया, ऑनलाइन आवेदन विधि, और साइबर सुरक्षा से संबंधित व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
कार्यक्रम के प्रायोजक श्री अरविन्द चौहान, ने अपने उद्बोधन में कहा कि MSME मंत्रालय देश के युवाओं, विशेष रूप से ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक स्तरों पर कार्यक्रम चला रहा है। इनका उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्ति नहीं, बल्कि रोजगार सृजन की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि MSME द्वारा वर्तमान में संचालित प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल हैं-
1- Entrepreneurship Awareness Programme: अल्पकालिक का कार्यक्रम, जिसमें उद्यमिता की मूल अवधारणाओं. बिजनेस आइडिया डेवलपमेंट और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है।
2- Entrepreneurship Development Programme 2 से 3 सप्ताह की अवधि वाला प्रशिक्षण, जिसमें उद्योग स्थापना की प्रक्रिया, प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाना, वित्तीय प्रबंधन और मार्केटिंग की जानकारी दी जाती है।3- Skill Development Training: 6 सप्ताह से 6 माह तक चलने वाले तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम, जिनमें फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, हैंडीक्राफ्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैब्रिकेशन, डिजिटल मार्केटिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़े कौशल सिखाए जाते हैं।
4- Management Development Programme उद्योग चला रहे उद्यमियों के लिए 3 से 5 दिन का प्रबंधन उन्नयन प्रशिक्षण कृ जिसमें प्रोडक्शन, अकाउंटिंग, मार्केट स्ट्रैटेजी और क्वालिटी कंट्रोल की जानकारी दी जाती है।
5- Women Entrepreneurship Programme महिला उद्यमियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया कार्यक्रम, जो आत्मनिर्भरता, वित्तीय साक्षरता और उत्पाद नवाचार पर केंद्रित है। प्रायोजक प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि 'आज का युग कौशल का युग है। जिसके पास हुनर है, वही प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़त्ता है। MSME का उद्देश्य हर युवा को प्रशिक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है ताकि भारत वैश्विक स्तर पर Skill Capital of the World बन सके।"
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कविता भदौरिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि 'भारतीय ज्ञान परंपरा सदैव प्रकृति के साथ संतुलन और समाज के सर्वांगीण विकास की शिक्षा देती रही है। मिलेट्स (श्री अन्न) उसी परंपरा का जीवंत प्रतीक है जहाँ अन्न को केवल भोजन नहीं, बल्कि जीवन ऊर्जा के रूप में देखा जाता है।
'प्राचार्य महोदय ने कहा कि मिलेट्स फूड प्रोसेसिंग आज के समय में कृषि, तकनीक और उद्यमिता का संगम बन चुका है। भारत सरकार द्वारा मिलेट्स वर्ष घोषित किए जाने के बाद इस क्षेत्र में अनेक अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे पारंपरिक कृषि उत्पादों को आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीक, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ें ताकि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक नवाचार का सुंदर मेल स्थापित हो सके।
उन्होंने विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए कहा कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाएँ मिलेट्स आधारित सूक्ष्म उद्योग स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। मिलेट्स फूड प्रोसेसिंग उद्योग महिलाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सम्मान दोनों का सशक्त माध्यम बन सकता है। 'प्राचार्य महोदय ने कहा कि MSME मंत्रालय द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएँ जैसे स्टार्टअप इंडिया, और महिला उद्यमिता विकास कार्यक्रम, महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन मार्गदर्शन प्रदान कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि हमारी नई पीढी भारतीय ज्ञान परंपरा से प्रेरणा लेकर आधुनिक उद्यमिता की राह अपनाती है. तो
भारत न केवल खाद्य सुरक्षा में, बल्कि वैश्विक पोषण अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने MSME प्रायोजक संस्था, मुख्य व विशेष वक्ताओं तथा आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया और सभी
विद्यार्थियों को इस कार्यशाला से प्रेरणा लेकर आत्मनिर्भर भारत निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका देवड़ा ने किया एवं आभार प्रो. दीपाली निगम ने माना।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एन.एल. गुप्ता, डॉ. स्नेहलता मुझाल्दा, डॉ. जगदीश मुजाल्दे, डॉ. महेश कुमार निंगवाल, डॉ. दिनेश सोलंकी, डॉ. सुनीता भायल, डॉ. प्रियंका देवडा, प्रो. सीमा नाईक, डॉ. इन्दु डावर, डॉ. स्मिता यादव, प्रो. दीपक सोलंकी, प्रो. लीना बास्कले, डॉ. लखन कुमार परमार, डॉ. अंकिता पागनिस, प्रो. पवन कुमार सिंह, प्रो. अलका तोमर, प्रो. सीमा भाटिया, प्रो. सोनाली जोशी, प्रो. आयुषी व्यास, प्रो. प्रियंका शर्मा, प्रो. प्रियंका शाह एवं अमृता यादव, डॉ. राकेश ठाकरे, प्रो. मनोज डुडवे, समस्त स्टॉफ छात्राएँ उपस्थित रही।
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