Wed, 28 Oct 2026
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: बड़वानी नागलवाड़ी किसान केबिनेट में 1207.44 करोड़ रुपए लागत की पानसेमल और 860.53 करोड़ रुपए लागत की वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति बड़वानी जिले के पानसेमल और वरला तहसीलों के जनजातीय ग्रामों को मिलेगा लाभ

बड़वानी नागलवाड़ी किसान केबिनेट में  1207.44 करोड़ रुपए लागत की पानसेमल और 860.53 करोड़ रुपए लागत की वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति बड़वानी जिले के पानसेमल और वरला तहसीलों के जनजातीय ग्रामों को मिलेगा लाभ
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1207.44 करोड़ रुपए लागत की पानसेमल और 860.53 करोड़ रुपए लागत की वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति बड़वानी जिले के पानसेमल और वरला तहसीलों के जनजातीय ग्रामों को मिलेगा लाभ *मुख्यमंत्री डॉ यादव की घोषणाओं के अनुपालन में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक में* *मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक आयोजित* मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में बड़वानी के नांगलवाड़ी में आयोजित नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक और नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक आयोजित की गई जिसमें 1 हजार 207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत की पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 860 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत की वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष डॉ यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषकों का हित और कल्याण शासन की प्राथमिकता है जिसे ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जा रही हैं। इन माइक्रो उद्वहन परियोजनाओं से बड़वानी जिले के लाभान्वित होने वाले पानसेमल तहसील के 55 ग्राम तथा वरला तहसील के 33 ग्राम ऊंचाई में स्थित होने, अल्पवर्षा क्षेत्र होने और भूजल स्तर अत्यंत कम होने से सिंचाई सुविधा से वंचित रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की दिनांक 11 जनवरी 2025 की घोषणा के अनुपालन में पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना तथा दिनांक 14 नवंबर 2025 की घोषणा के अनुपालन में वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना की नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक में प्रशासकीय स्वीकृति की अनुशंसा की गई, जिसे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई है। पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से बड़वानी जिले की तहसील पानसेमल में 22 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में लगभग 1 हजार 207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत से ग्राम सोंदुल से नर्मदा नदी से 7.20 क्यूमेक (74.65 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा जिससे 53 जनजातीय ग्राम लाभान्वित होंगे। परियोजना अंतर्गत भूमिगत प्रेशराइज्ड पाइप्ड नहर प्रणाली से पाइपलाइन बिछाकर सिंचाई व्यवस्था विकसित की जाएगी जिससे कृषक सीधे स्प्रिंकलर और ड्रिप इरीगेशन पद्धति से खेतों में सिंचाई कर सकेंगे। परियोजना में कोई डूब क्षेत्र नहीं है परन्तु भूमिगत पाइपलाइन, राइजिंग मेन और ग्रैविटी मेन के लिए 48.79 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई भूअर्जन, पंप हाउस और ट्रांसमिशन लाइन निर्माण के लिए 4 हेक्टेयर स्थाई भूअर्जन तथा 18 हेक्टेयर वन भूमि का अर्जन किया जाएगा। परियोजना के तहत 3 पंप हाउस से कुल 339.67 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए 5 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जाएगा। परियोजना में कुल 34.60 मेगावाट विद्युत की आवश्यकता होगी जिस पर वार्षिक विद्युत व्यय 34 हजार 249 रुपए प्रति हेक्टेयर रहेगा। वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना अंतर्गत बड़वानी जिले की तहसील अंजड़ के ग्राम मोहिपुरा से नर्मदा नदी से 4.96 क्यूमेक (51.42 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा जिससे तहसील वरला के 33 जनजातीय ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना की कुल लागत 860 करोड़ 53 लाख रुपए प्राक्कलित की गई है, जिसमें 4 पंप हाउस के माध्यम से 390 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है। परियोजना में 30.5 मेगावाट विद्युत आवश्यकता होगी जिस पर 33 हजार 316 रुपए वार्षिक विद्युत व्यय प्रति हेक्टेयर रहेगा। परियोजना के लिए 30 हेक्टेयर वनभूमि, 204.13 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई तथा 7.5 हेक्टेयर निजी भूमि का स्थाई भूअर्जन किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव तथा उपाध्यक्ष, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण डॉ राजेश राजौरा ने बताया कि पानसेमल और वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं से लाभान्वित होने वाले ग्राम जनजातीय बाहुल्य होने के साथ वन से घिरे हुए हैं। इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद बड़वानी जिले में कुल 70 प्रतिशत क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, जो वर्तमान में 60 प्रतिशत है। उन्होंने परियोजनाओं के विभिन्न घटकों का तकनीकी विवरण प्रस्तुत किया।
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