Rajendra Devray / Tue, Dec 16, 2025 / Post views : 340

सीएमओ माया मंडलोई को हटाने की उठ रही मंच से मांग |
धार जिले के धामनोद यू तो एक फौजी अपने फर्ज और कर्मनीति से पीछे नहीं हटते है... बात देश की शरहद सुरक्षा की हो या नगर की मूलभूत सुविधाओं के लिए जनता के अधिकार की हो...?
चिंता की बात यह है नगर के पार्षद से लेकर केंद्र तक भाजपा की सरकार है। और धामनोद नगर पूर्णतः भाजपा समर्पित नगर है ,जहां पार्षद भाजपा से है,परिषद अध्यक्ष भाजपा से है,विधायक भाजपा से है, यहां तक कि केंद्रीय राज्य मंत्री भाजपा से है नगर में स्थानीय निवास है व कार्यालय है। उसके बावजूद नगर के एक भाजपा के ही पार्षद जो कि रिटायर्ड फौजी है। जिन्हें वार्ड और नगर की जनता के लिए मूल सुविधाओं के लिए नगर की 10 सूत्रीय मांगों के लिए। आज अनशन पर बैठेने के लिए मजबूर हो गए।
नगर धामनोद में वार्ड की मूलभूत सुविधा के लिए धरने पर बैठे रिटायर्ड फ़ौजी वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद जितेंद्र सोलंकी ने दिनांक 13 दिसंबर वार शनिवार से पुरानी नगर परिषद कार्यालय, एबी रोड धामनोद के सामने शांतिपूर्ण धरना प्रारंभ किया।
मीडिया जानकारी में पार्षद सोलंकी ने बताया कि, सीएमओ हटाओ धामनोद बचाओ। नगर पिछले लंबे समय से स्वच्छता, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और जर्जर सड़कों जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। नगर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, नालियों का गंदा पानी पेयजल में मिल रहा है, रात के समय कई क्षेत्रों में अंधेरा छाया रहता है और सड़कें बदहाल हो चुकी हैं। विगत 4 वर्षों से अटके निर्माण कार्यों को लेकर जनता लगातार परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि , बार-बार शिकायतों और संवाद के बावजूद नगर परिषद द्वारा , कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई जिसके चलते नगर हित की भावना को लेकर, यह कदम उठाया गया।
खास बात यह है कि, भाजपा पार्षद और युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष होते हुए भी वे अपनी ही सरकार की नगर परिषद के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। उन्होंने नगरवासियों से शांति और संयम के साथ इस जनहित आंदोलन को नैतिक समर्थन देने की अपील की है।
धामनोद की सड़क इतनी जर्जर की थैले भी नहीं निकले:–आंखों देखा हाल धामनोद की जनता इन दिनों सीएमओ माया मंडलोई के कार्य काल इमरजेंसी के हालत बया कर रही है। धामनोद का कोई वार्ड कोई गली नहीं है जहां व्यक्ति सुरक्षित निकल सके। मार्ग ही नहीं बल्कि स्वच्छता में भी सड़को पर कचरों से बीमारियां फैल रही है। पक्की सड़के गड्ढों में तब्दील हो गई है। सड़कों पर धुल इस तरह की राहगीर धुल खाने को मजबूर हो गए है।
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