Rajendra Devray / Mon, Aug 3, 2026 / Post views : 209
श्रीखाटूश्याम मंदिर में भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ा आस्था का सैलाब, शास्त्रीजी ने बताए बर्बरीक के जीवन के पाँच अमूल्य सूत्र
अंजड़ राजेन्द्र देवराय नगर स्थित श्रीखाटूश्याम मंदिर में सार्वजनिक ज्ञान गंगा समिति एवं श्रीखाटूश्याम मंदिर समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जय श्री श्याम और राधे-राधे के जयघोषों के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में माताओं, बहनों, युवाओं एवं श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

कथावाचक पंडित आनंदकृष्ण शास्त्रीजी महाराज ने श्रीखाटूश्याम बाबा की महिमा का वर्णन करते हुए महाभारत काल के महान वीर बर्बरीक के प्रेरणादायी जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति बर्बरीक के जीवन से वचन की दृढ़ता, विनम्रता, त्याग, ईश्वर भक्ति एवं धर्म पालन जैसे पाँच गुण अपने जीवन में उतार ले, तो उसका जीवन सफल, सार्थक और आदर्श बन सकता है।

शास्त्रीजी ने बताया कि बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना गुरु मानकर दिए गए वचन का जीवनभर पालन किया। गुरु-शिष्य परंपरा का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने अपना शीश भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया। इसी अद्वितीय त्याग और अटूट भक्ति के कारण आज कलयुग में वे खाटूश्याम बाबा एवं शीश के दानी के रूप में समस्त श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बने हुए हैं।

कथा के दौरान शास्त्रीजी ने एकादशी व्रत की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि इस व्रत के पालन से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने सभी सनातन धर्मावलंबियों से प्रत्येक माह की एकादशी, प्रदोष, अमावस्या एवं पूर्णिमा को धार्मिक पर्व के रूप में मनाने का आह्वान किया।
श्रीमद्भागवत की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भागवत कथा का श्रवण करने से पितरों की तृप्ति होती है, प्रेत बाधाओं का निवारण होता है, जीवन में सकारात्मकता एवं आनंद का संचार होता है तथा राष्ट्र और धर्म के प्रति समर्पण की भावना जागृत होती है।
कथा के क्रम में शास्त्रीजी ने वराह अवतार, कपिल अवतार, सती चरित्र तथा राजा परीक्षित के प्रेरणादायक प्रसंगों का भी भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा और एकाग्रता के साथ सुना।
कथा के बीच-बीच में शास्त्रीजी एवं उनकी संगीत मंडली द्वारा प्रस्तुत मधुर श्याम एवं कृष्ण भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भजनों की स्वर लहरियों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे और पूरे पंडाल में भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
कार्यक्रम का समापन शाम 5 बजे सामूहिक महाआरती एवं प्रसादी वितरण के साथ हुआ। मंदिर समिति के अनुसार कथा में प्रतिदिन नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे आयोजन में उत्साह और श्रद्धा निरंतर बढ़ रही है।
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