Rajendra Devray / Wed, Aug 19, 2026 / Post views : 202
भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया, चढ़ाया निर्वाण लाडू
बड़वानी। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी के पावन अवसर पर जैन समाज द्वारा 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक निर्वाण महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दिगंबर जैन मंदिर सहित अतिशय क्षेत्र पार्श्वगिरी एवं सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में विशेष धार्मिक आयोजन हुए तथा भगवान पार्श्वनाथ को निर्वाण लाडू अर्पित किया गया।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ वाराणसी नगरी के राजा थे। उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर तप, साधना एवं आत्मसंयम का मार्ग अपनाया और तीर्थराज सम्मेद शिखर जी की सर्वोच्च टोंक स्वर्णभद्र कूट से योग निरोध के माध्यम से निर्वाण अर्थात मोक्ष प्राप्त किया। इसी पावन स्मृति में जैन समाज द्वारा प्रतिवर्ष मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया जाता है।
मंगलवार को अलसुबह दिगंबर जैन मंदिर में समाजजन एकत्रित हुए। चतुर्थ पट्टाचार्य आचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिका श्री सुप्रज्ञमति जी, आर्यिका श्री अनघमति जी माताजी एवं क्षुल्लिका श्री संभावमति जी माताजी के सानिध्य में भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक, शांतिधारा तथा निर्वाण कांड का वाचन विधि-विधानपूर्वक किया गया। इसके पश्चात भगवान के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित किया गया।
प्रथम अभिषेक का सौभाग्य अरिहा शुभम गोधा परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि शांतिधारा का सौभाग्य सुरेशचंद जी काला गांगली वाला परिवार ने प्राप्त किया। वहीं निर्वाण लाडू सिद्धार्थ एवं विकास पहाड़िया परिवार द्वारा अर्पित किया गया।
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद समाजजन पदयात्रा करते हुए बड़वानी के समीप स्थित प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र पार्श्वगिरी पहुंचे। यहां ध्वजारोहण एवं धार्मिक विधान संपन्न हुआ। ध्वजारोहण का सौभाग्य प्रेम कुमार राजमल जी जैन को प्राप्त हुआ। पार्श्वगिरी में निर्वाण लाडू चंदा जी एवं अशोक जी झांझरी, भीकनगांव परिवार द्वारा चढ़ाया गया।
इस धार्मिक आयोजन में निमाड़-मालवा सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक-श्राविकाएं एवं गुरु भक्त बड़ी संख्या में पहुंचे और भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में श्रद्धा अर्पित की।
तप, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश
मोक्ष कल्याणक के अवसर पर जैन समाज की कुंवारी बेटियों द्वारा विशेष रूप से उपवास रखा गया। उपवास के माध्यम से तप, संयम, इंद्रिय नियंत्रण, सादा जीवन और त्याग की भावना को आत्मसात करने का संदेश दिया गया। समाजजनों के अनुसार बालिकाओं को कुंवारी अवस्था में उपवास एवं धार्मिक साधना के लिए प्रेरित करने का उद्देश्य धर्म, धैर्य और सदाचार के संस्कारों को मजबूत करना है।
इस अवसर पर विशेष पूजा, सामायिक, स्वाध्याय एवं ध्यान भी किया गया। धार्मिक साधना के माध्यम से मन को शांत, पवित्र एवं आत्मचिंतन की ओर अग्रसर करने का संदेश दिया गया।
इसी क्रम में श्री सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में भी बड़ी संख्या में समाजजनों एवं श्रावकों ने पहुंचकर भगवान के दर्शन किए और श्रद्धापूर्वक निर्वाण लाडू अर्पित कर धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की।
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक वातावरण बना रहा। समाजजनों ने भगवान पार्श्वनाथ के सिद्धांतों—अहिंसा, संयम, तप, त्याग और आत्मशुद्धि—को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
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