Rajendra Devray / Thu, Aug 20, 2026 / Post views : 235
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बाल ब्रह्मचारी सुयश भैया व ब्रह्मचारिणी निर्मला दीदी अपनाएंगे संयम पथ, जैन समाज ने की दीक्षार्थियों की गोद भराई
बड़वानी (निप्र)। जैन धर्म में सांसारिक मोह-माया का त्याग कर संयम, तप और आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना सर्वोच्च आध्यात्मिक साधना मानी गई है। इसी भावना से प्रेरित होकर इंदौर निवासी बाल ब्रह्मचारी सुयश भैया जी एवं ब्रह्मचारिणी निर्मला दीदी आगामी समय में सांसारिक जीवन का त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार करते हुए मोक्ष मार्ग के पथिक बनेंगे।

आगामी 7 अक्टूबर को आदि सागर जी अंकलीकर परंपरा के चतुर्थ एवं वर्तमान पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज का मंगल अवतरण दिवस है। इस पावन अवसर पर अनेक संसारी जीव संयम एवं त्याग का मार्ग अपनाकर जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे।

इसी क्रम में भावी दीक्षार्थी बाल ब्रह्मचारी सुयश भैया जी एवं ब्रह्मचारिणी निर्मला दीदी ने बड़वानी स्थित बावनगजा सिद्ध क्षेत्र एवं पार्श्वगिरि अतिशय क्षेत्र पहुंचकर वंदना-दर्शन किए। उन्होंने पार्श्वगिरि पर विराजित आर्यिका मां सुप्रज्ञमति जी माताजी ससंघ का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात बड़वानी दिगंबर जैन मंदिर में दर्शन किए।
इस अवसर पर बड़वानी दिगंबर जैन समाज द्वारा दोनों दीक्षार्थियों की गोद भराई एवं बहुमान समारोह आयोजित किया गया। समाजजनों ने दीक्षार्थियों का तिलक लगाकर, माला पहनाकर तथा जैन धर्म की पगड़ी, मुकुट एवं पंचरंगी जैन धर्म के अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया।
समाज की महिलाओं ने परंपरानुसार गोद भराई की रस्म अदा की तथा महिलाओं द्वारा दीक्षार्थियों को राखी भी बांधी गई। पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और आत्मकल्याण की भावना का वातावरण रहा।
इस अवसर पर जैन समाज के महिला-पुरुषों के साथ युवा एवं बच्चे भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। समाजजनों ने भावी दीक्षार्थियों के संयम पथ की मंगलमय यात्रा तथा आत्मकल्याण की भावना के साथ उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की मंगलकामना की।
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