Rajendra Devray / Tue, Oct 20, 2026 / Post views : 94
नालछा में 20 वर्षों से गरबा महोत्सव की अनूठी परंपरा, विद्युत सज्जा और गुजराती धुनों पर झूमी मातृशक्ति
एक्सीलेंट सोशल क्लब का आयोजन बना आकर्षण का केंद्र; अष्टमी पर शिव मंदिर परिसर में देर रात तक उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह, नगर के विभिन्न पंडालों में भी गरबा की धूम
नालछा। शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पर नगर के आजाद मार्ग स्थित शिव मंदिर परिसर में एक्सीलेंट सोशल क्लब द्वारा भव्य एवं रंगारंग गरबा महोत्सव का आयोजन किया गया। आकर्षक विद्युत सज्जा, रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक गुजराती गरबा की धुनों ने पूरे परिसर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। माता रानी की आराधना में शामिल श्रद्धालु मनमोहक सजावट और गरबा प्रस्तुतियों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए।


दो दशक से जारी है धार्मिक आयोजन की परंपरा
एक्सीलेंट सोशल क्लब के युवाओं द्वारा पिछले 20 वर्षों से लगातार मां अम्बे की आराधना में गरबा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। दो दशक से जारी यह परंपरा नगर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में विशेष स्थान रखती है। इस वर्ष शिव मंदिर परिसर स्थित पंडाल को आकर्षक विद्युत झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया, जो श्रद्धालुओं और नगरवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।
पारंपरिक वेशभूषा में मातृशक्ति ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां

गरबा महोत्सव में मातृशक्ति और नन्ही बालिकाओं ने रंग-बिरंगी पारंपरिक गुजराती पोशाकों में सुसज्जित होकर गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। गुजराती लोकधुनों पर थिरकते कदमों और उत्साहपूर्ण सहभागिता ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। युवाओं में भी विशेष उत्साह दिखाई दिया। देर रात तक श्रद्धालु गरबा महोत्सव का आनंद लेते रहे और पूरा परिसर भक्ति, उल्लास एवं सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आया।
नगर के विभिन्न पंडालों में भी गरबा की धूम
नवरात्रि के अवसर पर नालछा नगर में जगह-जगह गरबा एवं धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कालिका मंदिर, राजवाड़ा चौक, कुशवाहा चौपाटी, कुमार मंडी, कृष्ण चौक, द्वारकाधीश मंदिर और अंबेडकर कॉलोनी सहित विभिन्न स्थानों पर गरबा की रौनक देखने को मिल रही है। रंग-बिरंगी सजावट, पारंपरिक परिधान और मां दुर्गा की आराधना से नगर का वातावरण उत्सवमय बना हुआ है।
धार्मिक आस्था के साथ संस्कृति और सामाजिक सहभागिता का संगम
एक्सीलेंट सोशल क्लब द्वारा दो दशकों से जारी यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता को भी प्रोत्साहित करता है। नवरात्रि के दौरान ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को पारंपरिक गरबा, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक उत्सवों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
रिपोर्ट: कांतिलाल शर्मा, नालछा
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