Rajendra Devray / Wed, Aug 19, 2026 / Post views : 227
श्रावण मास में आस्था का सैलाब: जाख्या से धर्मपुरी काशी विश्वनाथ मंदिर तक निकली 29वीं भव्य कलश यात्रा
धर्मपुरी। श्रावण मास के पावन अवसर पर ग्राम जाख्या से धर्मपुरी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर तक 29वीं भव्य एवं विशाल कलश यात्रा का आयोजन श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामवासियों एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग एवं बच्चे पारंपरिक व धार्मिक भावनाओं के साथ कलश यात्रा में शामिल हुए।

कलश यात्रा ग्राम जाख्या से प्रारंभ होकर धर्मपुरी के काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं द्वारा भगवान काशी विश्वनाथ का विधि-विधान से जलाभिषेक किया गया। पूरे यात्रा मार्ग में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा।

इंदौर मंडल के श्रीमहंत वेदमणि भारती महाराज ने कहा कि यह कलश यात्रा लगातार 29 वर्षों से सनातन संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं को जीवंत रखने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सनातन संस्कृति, धार्मिक समरसता, एकता और एकात्मकता का प्रतीक है। प्रत्येक वर्ष ग्रामवासी बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ इसमें सहभागी बनते हैं तथा यात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत किया जाता है।

कलश यात्रियों का भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश संगठन मंत्री श्री सुमेर सिंह सोलंकी पहलवान द्वारा फूल-मालाओं एवं राम नाम के दुपट्टे से स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष श्री सतीश मालवीय सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
यात्रा के संचालन में रिंकू निगम, पिंटू निगम एवं अजय निगम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं वरिष्ठ समाजसेवी श्री राकेश शर्मा एवं श्री अशोक निगम, उमाशंकर निगम तथा पुष्कर निगम द्वारा कलश यात्रा के संयोजन में सहयोग किया गया।
यह आयोजन श्रीराम मंदिर सेवा समिति के तत्वावधान में किया जाता है। समिति के सभी सहयोगी सदस्यों द्वारा अपना समय एवं सहयोग देकर प्रतिवर्ष इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाया जाता है।
आयोजन को सफल बनाने में प्रवीण भाटिया, राजवीर भाटिया, रज्जन ठाकुर, अंशुमान रघुवंशी, रवि शर्मा, गौरव निगम, ऋषि निगम, राजेश निगम, बलराम शर्मा, गोलू निगम एवं बलराम निगम सहित समस्त ग्रामवासियों एवं समिति सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
प्रशासन के लिए संदेश
श्रावण मास में आयोजित यह 29वीं कलश यात्रा क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश भी देती है। ऐसे आयोजनों में प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात, पेयजल, स्वच्छता एवं चिकित्सा जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किए जाने से श्रद्धालुओं को और बेहतर सुविधा मिल सकती है।
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