Rajendra Devray / Wed, Sep 23, 2026 / Post views : 140
खरगोन (निमाड़)। गुरव समाज पंचायत, गणगौर समिति एवं महिला मंडल, खरगोन के संयुक्त तत्वावधान में गुरव समाज पंचायत धर्मशाला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ निरंतर जारी है।

कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में नंदोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया।

कथा की व्यासपीठ पर विराजमान पंडित रामेश्वर जी जोशी (अकाब्ल्या वाले) अपने श्रीमुख से संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण का रसपान करा रहे हैं।

उनके मधुर प्रवचन और भक्ति से ओत-प्रोत भजनों ने पूरे कथा परिसर को भक्तिमय और आनंदमय बना दिया। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए।
नंदोत्सव के अवसर पर डॉ. राहुल निमाड़े (राजनगर वाले) को यजमान बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर समाज एवं परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

कथा के चौथे दिन भी सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण किया। पूरे धर्मशाला परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
जब भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ, तब वे दिव्य बालरूप में प्रकट हुए।

उनके चार भुजाएँ थीं, हाथों में शंख, गदा आदि दिव्य आयुध थे, वक्षस्थल पर श्रीवत्स का चिन्ह, गले में कौस्तुभ मणि और पीताम्बर धारण किए हुए थे।

उनका स्वरूप समस्त संसार के कल्याण और धर्म की स्थापना का संदेश देता है।
नंदोत्सव का जनकल्याणकारी संदेश यही है (श्रीमद्भागवत 10.5)
नन्दः स्वपुत्रमादाय प्रीतः परमया मुदा।
ब्राह्मणेभ्यो ददौ दानं वासोऽलंकारगोदनम्॥
भावार्थ
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर नंद बाबा अपार आनंद से भर गए। उन्होंने ब्राह्मणों, जरूरतमंदों और समाज के लोगों को वस्त्र, आभूषण, गौ और अन्य दान दिए।
यही नंदोत्सव का संदेश है
अपने सुख को समाज के साथ बाँटना, दान, सेवा और जनकल्याण करना।
जनकल्याणकारी संदेश
नंदोत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि सेवा, दान, प्रेम, करुणा और समाज के प्रत्येक व्यक्ति के सुख की कामना का पर्व है।
श्रीमद्भागवत का संदेश है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मानव जीवन में धर्म, प्रेम और लोकमंगल की स्थापना के लिए हुआ।
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