Rajendra Devray / Mon, Sep 7, 2026 / Post views : 318
पार्श्वगिरी तीर्थ पर 23 फीट उत्तुंग पार्श्वनाथ भगवान जिनालय एवं गुरु मंदिर का भव्य भूमि पूजन-शिलान्यास
धर्म और आस्था के नए अध्याय का शुभारंभ, निमाड़-मालवा सहित राजस्थान से उमड़े गुरु भक्त
बड़वानी (निप्र)। बड़वानी के समीप स्थित अतिशय क्षेत्र पार्श्वगिरी तीर्थ पर रविवार को धर्म, आस्था और भक्ति से ओतप्रोत वातावरण में 23 फीट उत्तुंग भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा एवं तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की प्रतिमा विराजित करने के लिए जिनालय एवं गुरु मंदिर का भव्य भूमि पूजन एवं शिलान्यास विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।

अतिशय क्षेत्र पार्श्वगिरी तीर्थ का निर्माण तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से हुआ है। चतुर्थ पट्टाचार्य परम पूज्य आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की प्रेरणा से यहां भगवान पार्श्वनाथ की 23 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा एवं आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य प्रारंभ किया गया।

भूमि पूजन एवं शिलान्यास का पुण्यार्जन इंदौर निवासी मुकेश कुमार एवं दीपक कुमार जैन तथा उदयपुर, राजस्थान निवासी शांतिलाल जी एवं सुशीला जी परिवार द्वारा किया गया। इंदौर नगर पुरोहित पंडित नितिन जी झांझरी ने मंत्रोच्चार एवं पूर्ण वैदिक विधि-विधान के साथ भूमि पूजन एवं शिलान्यास की धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराईं।

अभिषेक और शांतिधारा से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
भूमि पूजन एवं शिलान्यास से पूर्व भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक, आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की प्रतिमा का अभिषेक एवं शांतिधारा सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इस दौरान तीर्थ परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धापूर्वक सहभागिता की।

इस पावन अवसर पर बड़वानी में विराजित परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका सुप्रज्ञमति जी माताजी के संघस्थ दिशा दीदी सहित पार्श्वगिरी ट्रस्ट के पदाधिकारी, ट्रस्ट से जुड़े सदस्य तथा निमाड़, मालवा और राजस्थान से बड़ी संख्या में गुरु भक्त उपस्थित रहे।
धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में भगवान पार्श्वनाथ एवं गुरुदेव के प्रति गहरी श्रद्धा और उत्साह दिखाई दिया। उपस्थित भक्तों ने 23 फीट उत्तुंग भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा एवं गुरु मंदिर निर्माण को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक उपलब्धि बताते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, संस्कार और आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बनने की कामना की।
पार्श्वगिरी तीर्थ पर प्रस्तावित भव्य जिनालय और गुरु मंदिर के निर्माण से यह क्षेत्र जैन धर्मावलंबियों के लिए एक और महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में अग्रसर होगा
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