Rajendra Devray / Sat, Sep 12, 2026 / Post views : 248
नशे ने बिगाड़ा था घर, लोक अदालत की समझाइश ने बचाया परिवार
पति-पत्नी ने भुलाए मनमुटाव, एक-दूसरे को पहनाई माला और मिठाई खिलाकर शुरू की नई जिंदगी; पौधा भेंट कर दी पर्यावरण संरक्षण की सीख
बड़वानी, 12 सितंबर। शराब की लत से बढ़ते पारिवारिक विवाद के कारण टूटने की कगार पर पहुंचा एक परिवार नेशनल लोक अदालत की समझाइश के बाद फिर से एकजुट हो गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बड़वानी के प्रयासों और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेन्द्र कुमार जैन की संवेदनशील समझाइश का दंपत्ति पर ऐसा सकारात्मक प्रभाव पड़ा कि दोनों ने पुराने मनमुटाव भुलाकर साथ रहने का निर्णय लिया।

मामले के अनुसार पति के प्रतिदिन अत्यधिक शराब का सेवन करने और पत्नी को घर खर्च के लिए पर्याप्त राशि नहीं देने के कारण दोनों के बीच लगातार विवाद हो रहा था। पति से प्रताड़ित होकर पत्नी ने विधिक सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन प्रस्तुत किया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा विधिक सहायता योजना के तहत पत्नी की ओर से पैनल अधिवक्ता सुश्री जया शर्मा तथा पति की ओर से श्री अनुज कुमार जैन को नियुक्त किया गया। प्रकरण न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुश्री राजश्री भार्गव के न्यायालय में विचाराधीन था।
समझाइश ने बदला विवाद का रुख
12 सितंबर 2026 को आयोजित नेशनल लोक अदालत में प्रकरण को आपसी सहमति एवं समझौते के लिए रखा गया। लोक अदालत की पीठ के समक्ष दोनों पक्ष उपस्थित हुए। इस दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेन्द्र कुमार जैन ने पति को संवेदनशीलता के साथ समझाइश देते हुए नशे के दुष्परिणाम बताए।
उन्होंने कहा कि नशे से केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं होता, बल्कि व्यक्ति के शरीर, परिवार और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी भारी नुकसान पहुंचता है। यदि नशा छोड़ने में कठिनाई हो तो नशा मुक्ति केंद्र की सहायता ली जा सकती है। उन्होंने पति को घर-परिवार की जिम्मेदारी निभाने और घर खर्च में पूर्ण सहयोग करने की समझाइश दी। वहीं पत्नी को भी पति के सम्मान और पारिवारिक सामंजस्य बनाए रखने की सीख दी गई।
माला पहनाकर, मिठाई खिलाकर फिर शुरू किया साथ
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की समझाइश का दंपत्ति पर सकारात्मक असर पड़ा। पति ने नशा छोड़ने का पूरा प्रयास करने तथा घर खर्च में सहयोग देने का वचन दिया। इसके बाद दोनों ने आपसी मनमुटाव भुलाकर पुनः साथ रहने की सहमति जताई।
सहमति बनने के बाद दंपत्ति ने एक-दूसरे को माला पहनाई और मिठाई खिलाकर नए जीवन की शुरुआत की। यह दृश्य लोक अदालत में मौजूद लोगों के लिए भी भावुक एवं प्रेरणादायी रहा।
न्याय के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेन्द्र कुमार जैन एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट राजश्री भार्गव ने दंपत्ति को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए एक पौधा भेंट किया। दोनों ने पौधे को अपने नए जीवन और पारिवारिक सुख-शांति के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद दंपत्ति राजी-खुशी अपने घर के लिए रवाना हुआ।
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