Rajendra Devray / Sat, Aug 8, 2026 / Post views : 180
रेशम की डोर से रिश्तों की डोर जोड़ रहे मनोरोगी, बना रहे आकर्षक राखियां
आशा आश्रय गृह में उपचाररत मनोरोगियों ने संभाला राखी निर्माण का जिम्मा, स्वावलंबन के साथ त्योहारी संवेदनाओं से जुड़ने की पहल
बड़वानी, 08 अगस्त 2026। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व नहीं, बल्कि रिश्तों की मजबूती और सामाजिक संवेदनाओं का प्रतीक भी है। इसी भावना को साकार करते हुए आशाग्राम ट्रस्ट के आशा आश्रय गृह में उपचाररत मनोरोगी इन दिनों आकर्षक राखियों के निर्माण में जुटे हुए हैं। रेशम के धागों से बनाई जा रही ये राखियां उनके लिए केवल हस्तनिर्मित वस्तुएं नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, स्वावलंबन और समाज से दोबारा जुड़ने का माध्यम बन रही हैं।

आशाग्राम ट्रस्ट विगत चार दशकों से अधिक समय से मानसिक रूप से बीमार एवं परिवार से बिछड़े लोगों को उपचार, संरक्षण और पुनर्वास उपलब्ध कराने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रहा है। संस्था का प्रयास है कि आश्रय गृह में रह रहे लोगों के भीतर अपनत्व, संवेदना और आत्मनिर्भरता की भावना को निरंतर मजबूत किया जाए।
राखी निर्माण से जाग रही संवेदनाएं
आशाग्राम ट्रस्ट के सचिव डॉ. चक्रेश पहाड़िया ने मनोरोगियों को राखी निर्माण के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि परिवार से बिछड़कर आश्रय गृह में जीवन बिताने वाले मनोरोगियों के लिए त्योहारों की संवेदनाएं कहीं पीछे छूट जाती हैं। ऐसे में संस्था विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उनके भीतर पारिवारिक भावनाओं और सामाजिक जुड़ाव को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि मनोरोगियों को स्वावलंबी बनाना, उनकी रचनात्मक क्षमता को सामने लाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।
सुंदर राखियां बनाने में जुटे आश्रय गृहवासी
आशा आश्रय गृह की मैनेजर श्रीमती साधना भावसार के संयोजन में उपचाररत मनोरोगी उत्साह के साथ राखियां तैयार कर रहे हैं। रंग-बिरंगे रेशमी धागों और सजावटी सामग्री से बनाई जा रही राखियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
यह पहल मनोरोगियों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ काम के प्रति सम्मान और आत्मनिर्भरता का अनुभव भी करा रही है।
बाजार में उपलब्ध होंगी हस्तनिर्मित राखियां
ट्रस्ट सचिव डॉ. पहाड़िया ने बताया कि आशा आश्रय गृह के निवासियों द्वारा तैयार की गई राखियां आमजन के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए आशा आश्रय गृह के साथ-साथ शहर के किसी निर्धारित स्थान पर स्टॉल लगाया जाएगा, जहां नागरिक इन हस्तनिर्मित राखियों की खरीदारी कर सकेंगे।
एक राखी खरीदना, एक संवेदना से जुड़ना
आशाग्राम ट्रस्ट की यह पहल रक्षाबंधन के पर्व को एक नई सामाजिक संवेदना से जोड़ रही है। इन राखियों के माध्यम से जहां भाई-बहन के प्रेम का संदेश घर-घर पहुंचेगा, वहीं इन्हें बनाने वाले मनोरोगियों को सम्मान, आत्मविश्वास और समाज से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।
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