Rajendra Devray / Sat, Oct 10, 2026 / Post views : 152
सर्व पितृ मोक्षदायिनी अमावस्या पर जीरापुर में उमड़ा आस्था का सैलाब
प्राचीन चौंसठ योगिनी माताजी मंदिर और मानसरोवर तालाब में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, पितरों के तर्पण और पूजन के साथ भक्तों ने किए माता के दर्शन

नालछा। सर्व पितृ मोक्षदायिनी शनिचरी अमावस्या के पावन अवसर पर नालछा से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित जीरापुर के प्राचीन चौंसठ योगिनी माताजी मंदिर एवं मानसरोवर तालाब पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही यहां श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जो दिनभर जारी रहा। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए भक्तों ने मानसरोवर तालाब में स्नान कर पितरों के निमित्त तर्पण किया तथा चौंसठ योगिनी माताजी के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।

पितरों के प्रति श्रद्धा, माताजी के चरणों में आस्था
सनातन परंपरा में सर्वपितृ अमावस्या को पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण का विशेष पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इसी धार्मिक भावना के साथ जीरापुर स्थित मानसरोवर तालाब पर भी श्रद्धालुओं ने पितरों का स्मरण कर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया और प्राचीन चौंसठ योगिनी माताजी मंदिर में पूजा-अर्चना की।

मानसरोवर तालाब से जुड़ी हैं श्रद्धालुओं की विशेष मान्यताएं
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मानसरोवर तालाब में स्नान और चौंसठ योगिनी माताजी के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्त्व है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने और माता के चरणों में शीश नवाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है। इन्हीं मान्यताओं के चलते इस पावन स्थल पर प्रत्येक वर्ष धार्मिक पर्वों और विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इंदौर, खंडवा, खरगोन और रतलाम से भी पहुंचे भक्त
इस अवसर पर इंदौर, खंडवा, खरगोन, रतलाम सहित विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु जीरापुर पहुंचे। पूरे दिन मंदिर परिसर और मानसरोवर तालाब के आसपास धार्मिक गतिविधियों का माहौल बना रहा। भक्तों ने माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
जीरापुर का प्राचीन चौंसठ योगिनी माताजी मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था और लोकपरंपराओं का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है। विशेष पर्वों पर यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस स्थल के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है।
रिपोर्टर: कांतिलाल शर्मा, नालछा गुरव संवाद समाचार पत्र
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