Rajendra Devray / Tue, Aug 11, 2026 / Post views : 792
बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़?
सरस्वती ज्ञान मंदिर की परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल, क्षमता से अधिक बच्चों को टेंपो में बैठाने का आरोप
उमरबन | सन्नी माली
धार जिले के उमरबन में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। उमरबन स्थित सरस्वती ज्ञान मंदिर स्कूल के बच्चों को एक छोटे टेंपो में कथित तौर पर क्षमता से अधिक संख्या में बैठाकर ले जाने का मामला सामने आया है। घटना से संबंधित फोटो और वीडियो सामने आने के बाद स्कूल की परिवहन व्यवस्था तथा बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि उमरबन बस स्टैंड क्षेत्र में बच्चों को एक टेंपो में बड़ी संख्या में बैठाया गया था। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार वाहन में बच्चों की संख्या उसकी निर्धारित क्षमता की तुलना में अधिक दिखाई दे रही थी। यदि तस्वीरों और वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति सही पाई जाती है, तो यह बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है।

📹 वीडियो बनाने पर वाहन लेकर चला गया चालक
मिली जानकारी के अनुसार पत्रकार संतोष चौहान द्वारा उमरबन बस स्टैंड पर बच्चों के परिवहन की व्यवस्था की फोटो और वीडियो बनाने का प्रयास किया गया। इसी दौरान संबंधित टेंपो चालक वाहन को वापस लेकर वहां से निकल गया।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को किस प्रकार के वाहनों से लाया-ले जाया जा रहा है और क्या इन वाहनों की नियमित रूप से जांच की जाती है?
⚠️ स्कूल वाहन की सुरक्षा व्यवस्था की जांच जरूरी
स्कूल जाने वाले बच्चों के परिवहन में वाहन की फिटनेस, पंजीयन, परमिट, बीमा, चालक का वैध लाइसेंस, निर्धारित यात्री क्षमता तथा अन्य सुरक्षा मानकों का पालन महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्कूल वैन के लिए बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा आवश्यकताओं का मसौदा मानक भी जारी किया है।
ऐसे में स्थानीय नागरिकों का कहना है कि संबंधित विभाग को उमरबन के स्कूल वाहनों की मौके पर जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि बच्चों को परिवहन करने वाले वाहनों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
⚖️ किन कानूनी प्रावधानों के तहत हो सकती है कार्रवाई?
मामले की जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो वाहन की स्थिति और दस्तावेजों के आधार पर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराएं लागू हो सकती हैं। लाइसेंस के बिना वाहन चलाने की स्थिति में।
इन धाराओं में से कौन-सी धारा वास्तव में लागू होगी, यह वाहन के पंजीयन, परमिट, क्षमता, चालक के दस्तावेज और जांच में सामने आने वाले अन्य तथ्यों पर निर्भर करेगा। मोटर वाहन अधिनियम में उपरोक्त प्रावधान दर्ज हैं।
🏫 स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर भी सवाल
बच्चों के परिवहन की व्यवस्था में स्कूल प्रबंधन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि शिक्षा विभाग यह जांच करे कि स्कूल द्वारा विद्यार्थियों के परिवहन के लिए किन वाहनों का उपयोग किया जा रहा है और क्या उनके दस्तावेज तथा सुरक्षा मानक पूरे हैं।
स्कूल प्रबंधन एवं प्राचार्य सुशील जी से भी इस संबंध में उनका पक्ष लिया जाना आवश्यक है कि बच्चों के परिवहन की व्यवस्था किस एजेंसी या वाहन संचालक के माध्यम से की जा रही है और क्या संबंधित वाहनों की जांच की जाती है।
🔎 आरटीओ और शिक्षा विभाग से जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने आरटीओ एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच की जाए। संबंधित टेंपो की—
फिटनेस, परमिट, बीमा, पंजीयन, निर्धारित यात्री क्षमता, चालक का लाइसेंस तथा स्कूल परिवहन से जुड़े सुरक्षा मानकों
की जांच की जाए।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि यदि वाहन में वास्तव में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया था, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और क्या नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
❓ हादसे से पहले जागेगा प्रशासन?
बच्चे किसी भी समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैं। उनके परिवहन में छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम दे सकती है। इसलिए सवाल केवल एक टेंपो का नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों की परिवहन व्यवस्था की नियमित निगरानी का है।
अब देखना यह है कि उमरबन के संबंधित शिक्षा अधिकारी और आरटीओ विभाग इस मामले में कब जांच करते हैं और वास्तविक स्थिति जनता के सामने कब आती है।
जनता का सवाल साफ है—क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतजार करेगा या हादसे से पहले ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करेगा
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