Rajendra Devray / Thu, Aug 20, 2026 / Post views : 211
सुरेश दहीभाते की आंखें अब दो लोगों को दिखाएंगी खूबसूरत दुनिया
अंजड़/बड़वानी, 20 अगस्त 2026। मानव जीवन के साथ-साथ जीवन के बाद भी मानव सेवा और परोपकार की भावना को जीवंत रखने का प्रेरणादायी उदाहरण अंजड़ के दहीभाते परिवार ने प्रस्तुत किया है। परिवार के सदस्य सुरेश दहीभाते के निधन के बाद परिजनों ने उनकी आंखों का नेत्रदान करवाकर दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी लाने का पुनीत कार्य किया।
सुरेश दहीभाते के निधन के पश्चात श्री रविंद्र कुलकर्णी ने उनके पुत्र समीर एवं परिवारजनों से नेत्रदान के लिए सहमति प्राप्त की तथा सामाजिक कार्यकर्ता अजित जैन को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही नेत्रदान के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय डॉ. चक्रेश पहाड़िया, अजित जैन एवं निशा रणदा दहीभाते परिवार के निवास पर पहुंचे और आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर नेत्रदान संपन्न करवाया।
नेत्रदान के बाद प्राप्त कॉर्निया को सुरक्षित रूप से एम.के. इंटरनेशनल आई बैंक, इंदौर पहुंचाया गया, जहां इसका उपयोग जरूरतमंद दृष्टिहीन लोगों को दृष्टि प्रदान करने के लिए किया जाएगा।
दुख की घड़ी में लिया मानवता का बड़ा संकल्प
परिजन के निधन के बाद परिवार के लिए यह बेहद भावुक और कठिन समय था, लेकिन दहीभाते परिवार ने व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठकर मानव कल्याण को प्राथमिकता दी। परिवार के इस निर्णय से न केवल दो लोगों के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद बनी है, बल्कि समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता का भी संदेश गया है।
रोटरी क्लब की टीम ने दहीभाते परिवार के इस प्रेरणादायी निर्णय के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नेत्रदान महादान है। मृत्यु के बाद किसी जरूरतमंद को दृष्टि प्रदान करना मानवता की ऐसी सेवा है, जो दिवंगत व्यक्ति की स्मृति को हमेशा जीवित रखती है।
दहीभाते परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और लोगों को नेत्रदान के महत्व को समझते हुए आगे आने का संदेश देता है।
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