Rajendra Devray / Sat, Sep 5, 2026 / Post views : 472
121 वर्षों से अंजड़ के लक्ष्मी नारायण मंदिर में आस्था का दीप प्रज्वलित, भव्य रूप से मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
हजारों श्रद्धालुओं ने किए भगवान लक्ष्मी नारायण एवं श्रीकृष्ण के दर्शन, जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर

अंजड़। नगर के प्राचीन एवं श्रद्धा के प्रमुख केंद्र लक्ष्मी नारायण मंदिर में इस वर्ष भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व परंपरागत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। मंदिर में पिछले 121 वर्षों से लगातार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाए जाने की परंपरा चली आ रही है। यही वजह है कि जन्माष्टमी के अवसर पर अंजड़ ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचते हैं।

पाटीदार समाज के अध्यक्ष गोविंद भाई आवलिया ने बताया कि यह परंपरा आज 121 वर्षपर्व हमारे पाटीदार समाज के पूर्वजों के द्वारा स्थापित लक्ष्मी नारायण मंदिर में प्रारंभ की गई थी जो आज भी निरंतर चल रही हे

जन्माष्टमी पर्व को लेकर मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की गईं। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया तथा भगवान लक्ष्मी नारायण और बाल गोपाल की मनमोहक झांकी सजाई गई। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण नजर आया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की।

आधी रात को हुआ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव
जन्माष्टमी के अवसर पर दिनभर मंदिर में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहा। शाम होते-होते मंदिर परिसर में भक्तों की संख्या बढ़ती गई। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन एवं भगवान श्रीकृष्ण की आराधना में भाग लिया। जैसे-जैसे घड़ी की सुई मध्यरात्रि की ओर बढ़ी, वैसे-वैसे भक्तों का उत्साह भी चरम पर पहुंच गया।

मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मंदिर परिसर ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। भगवान के जन्मोत्सव के पश्चात आरती एवं पूजा-अर्चना की गई तथा प्रसाद का वितरण किया गया।
121 वर्षों से कायम है परंपरा
लक्ष्मी नारायण मंदिर अंजड़ की धार्मिक परंपराओं में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष स्थान है। मंदिर में 121 वर्षों से लगातार जन्माष्टमी पर्व मनाए जाने की परंपरा नगर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा से नगरवासियों की आस्था गहराई से जुड़ी हुई है।
बुजुर्ग श्रद्धालुओं का कहना है कि वर्षों से जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में विशेष आयोजन होते आ रहे हैं और समय के साथ आयोजन का स्वरूप भले ही बदला हो, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और भक्ति आज भी उसी तरह कायम है।
हजारों भक्तों ने किए दर्शन
जन्माष्टमी के अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने लक्ष्मी नारायण मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन किए। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तिमय माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दर्शन एवं पूजा की व्यवस्थाएं की गईं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंचे।

अंजड़ का लक्ष्मी नारायण मंदिर जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़ और गूंजते जयकारों ने पूरे वातावरण को कृष्णमय कर दिया।
आस्था, परंपरा और भक्ति के इस अद्भुत संगम के साथ अंजड़ के लक्ष्मी नारायण मंदिर में मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी ने एक बार फिर नगर की 121 वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा को जीवंत कर दियादिर
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