Rajendra Devray / Sat, May 30, 2026 / Post views : 436
संरक्षित स्मारक घोषित होने के बाद भी उपेक्षा का शिकार परमारकालीन देवारा शिव मंदिर, जीर्णोद्धार की राह देख रही ऐतिहासिक धरोहर
मनावर। नर्मदा नदी के तट पर स्थित परमारकालीन देवारा शिव मंदिर आज भी अपने गौरवशाली इतिहास, धार्मिक महत्व और अद्भुत स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। लेकिन विडंबना यह है कि पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किए जाने के बाद भी यह प्राचीन धरोहर संरक्षण और जीर्णोद्धार की राह देख रही है। समय के साथ मंदिर की संरचना क्षरण का शिकार हो रही है, जबकि संरक्षण की योजनाएं अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल सकी हैं।

देवारा शिव मंदिर परमारकालीन स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण परमार राजाओं द्वारा कराया गया था। कभी अपनी भव्यता और कलात्मक शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर आज भी अपनी मूल पहचान को संजोए खड़ा है। मंदिर का विशाल शिवलिंग और प्राचीन वास्तुकला श्रद्धालुओं तथा इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करती है।

महाशिवरात्रि, श्रावण मास और अन्य धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। नर्मदा जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं इसे क्षेत्र की प्रमुख आस्था स्थली बनाती हैं। मान्यता है कि संत 1008 गजानन महाराज ने यहां पूजा-अर्चना कर इसकी महिमा का वर्णन किया था, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि 6 दिसंबर 2022 को पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर को संरक्षित स्मारक घोषित करते हुए संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए पत्र जारी किया गया था। उस समय मंदिर के पुनर्निर्माण और विकास की योजनाओं की घोषणा भी की गई थी। इससे क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी थी कि वर्षों से उपेक्षित इस ऐतिहासिक धरोहर को नया स्वरूप मिलेगा, लेकिन आज तक कोई उल्लेखनीय कार्य दिखाई नहीं देता।

ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का आरोप है कि पुरातत्व विभाग की उदासीनता के कारण मंदिर लगातार जर्जर होता जा रहा है। मंदिर के कई हिस्सों में टूट-फूट दिखाई देती है, जबकि प्राचीन पत्थर और कलात्मक संरचनाएं प्राकृतिक क्षरण का सामना कर रही हैं। यदि समय रहते संरक्षण नहीं किया गया तो यह अमूल्य धरोहर गंभीर नुकसान झेल सकती है।
इतिहासकारों के अनुसार मंदिर के शिखर को अतीत में हुए आक्रमणों के दौरान क्षति पहुंची थी, लेकिन इसके बावजूद मंदिर आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान को बनाए हुए है। यही कारण है कि यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ इतिहास और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग से मांग की है कि मंदिर संरक्षण की घोषणा को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि शीघ्र जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ कर इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित किया जाए। उनका कहना है कि देवारा शिव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है,पुरातत्व संरक्षित करने के बाद से आजतक वहाँ चौकीदार भी नही रखा गया है विभाग की ये लापरवाही सनातन के लिये खतरा है यह विभाग की जवाबदारी है जिसे संरक्षित करना शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन